फिर बेपर्दा हुआ पाक, हेडली बोला- हाफिज़ सईद ने रची थी मुंबई हमले की साजिश

मुंबई (9 फरवरी): गला फाड़ फाड़ कर खुद को बेगुनाह बताने वाला हाफिज़ आज बेनकाब हो गया। इसे बेनकाब किसी और ने नहीं बल्कि खुद उसके साथ मिलकर मुंबई हमले की साज़िश में शामिल डेविड हैडली ने किया। मुंबई में हेडली की दूसरे दिन की गवाही खत्म हो गई है। गवाही के बाद सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने बताया है कि हेडली ने आज भी कई अहम खुलासे किए। हेडली ने बताया कि वो बार बार मुंबई आता था। उसने होटल ताज के साथ कई और जगह की भी रेकी आती थी। सबसे बड़ी बात हेडली ने जो बताई वो ये कि आईएसआई लश्कर को फाइनेंशियल मदद करता है।

मुंबई की स्पेशल कोर्ट में दी गई गवाही में हेडली ने कबूल किया कि मुंबई हमले के पीछे हाफिज़ सईद की साज़िश थी। हाफिज़ सईद ही इस हमले का मास्टर माइंड है और इस साज़िश के लिए पाकिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल हुआ है, जहां हेडली को आतंक की ट्रेनिंग मिली।

बेपर्दा हुआ पाकिस्तान, डेविड हेडली ने कोर्ट के सामने कबूल किया कि... > वो फर्ज़ी पासपोर्ट के ज़रिए आठ बार भारत में घुसा > सात बार पाकिस्तान के रास्ते और एक बार सऊदी अरब के रास्ते मुंबई पहुंचा > हेडली को इसमें मदद लश्कर के आतंकी साजिद मीर ने किया > साजिद ने उसे भारतीय पासपोर्ट उपलब्ध कराया था। मैंने भारत में घुसने के लिए अपना नाम बदला।  > मैं एक अमेरिकी नाम से भारत में घुसना चाहता था। नाम बदलने के बाद मैंने इसकी जानकारी अपने सहयोगी और लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करने वाले साजिद मीर को दी। > 26/11 हमले के बाद मैं 7 मार्च 2009 को फिर भारत आया। मैं लाहौर से दिल्ली पहुंचा था। मैं आठ में से सात बार पाकिस्तान से भारत आया और एक बार सऊदी अरब से। > साजिद मीर ने मुझसे मुंबई शहर के सामान्य वीडियो लेने के लिए कहा था।

हैडली ने कोर्ट के सामने अपने बचपन, स्कूली दिनों, कॉलेज की पढ़ाई से लेकर पाकिस्तान में दी गई आतंकी ट्रेनिंग का भी जिक्र किया। हेडली ने बताया की कैसे वो स्कूल के दिनों से ही लश्कर के साथ जुड़ चुका था। डॉ. तहव्वार हुसैना राणा ने मुझे भारतीय वीज़ा दिलाने में मदद की थी। राणा से मेरी मुलाकात पंजाब सूबे के एक स्कूल में हुई थी। राणा पांच साल तक मेरे साथ स्कूल में पढ़ा था। जब मुझे वीज़ा मिल गया तो साजिद मीर और मेजर इकबाल काफी खुश थे।

हेडली ने हमलों में आईएसआईए और पाकिस्तानी फौज का हाथ होने की बात भी कबूली। उसने कबूला कि हमले को हाफिज सईद के इशारे पर अंजाम दिया गया। आईएसआई की मदद से हमले किए गए। रेकी के लिए पैसा भी दिया गया। मेजर अली ने ही मेरा परिचय आईएसआई के मेजर इकबाल से कराया था। मुझे वीज़ा मिलने के बाद मेजर अली ने कहा था तुम भारत के खिलाफ सूचनाएं जुटाने में काम आओगे। दरअसल मेजर अली ISI के लिए काम करता था और दोनों तब संपर्क में आए थे जब हेडली को अफगानिस्तान बॉर्डर पर ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

26/11 हमले से पहले दो बार हुई थी मुंबई में हमले की नाकाम कोशिश अपने कबूलनामे में हेडली ने कहा कि वो हाफिज़ सईद से प्रभावित था। वो लश्कर का कट्टर समर्थक भी था। 2002 में वो मुज़फ्फराबाद में लश्कर में शामिल हुआ था। इस खुलासे में सबसे नई बात जो सामने आई है जिसका ज़िक्र अभी तक जांच एजेंसियों ने नहीं किया था। वो ये कि 26/11 हमले से पहले दो बार मुंबई में हमले की कोशिश की गई थी लेकिन दोनों बार प्लान नाकाम रहा था। हमले की पहली कोशिश सितंबर 2008 में की गई थी। खुलासे के मुताबिक दोनों बार उसी आतंकी ग्रुप ने हमला किया था...जिसने 26/11 को अंजाम दिया था। लेकिन पहली बार में हाथियारों से लदा बोट समंदर में एक चट्टान से टकरा गया था, जिसके बाद प्लान नाकाम हो गया था।

हेडली के कबूलनामे में कई और खुलासे हुए हैं जिससे सईद पर शिकंजा कसने से कोई नहीं रोक पाएगा

> दिल्ली में उपराष्ट्रपति के घर, इंडिया गेट और CBIऑफिस की भी रेकी की। > पाक में बैठे आईएसआई के मेजर इकबाल और समीर अली उसके हैंडलर थे। > लश्कर के जकी उर रहमान लखवी का हैंडलर ISI का ब्रिगेडियर रिवाज था। > लखवी की गिरफ्तारी के बाद ISI चीफ शुजा पाशा उससे मिलने भी गए थे।

हालांकि हमले के बाद से लगातार पाकिस्तान उन सबूतों को झुठलाता रहा है जिसे भारत ने उसे सौंपा था, लेकिन अब हेडली की गवाही के बाद पाकिस्तान कटघरे में खड़ा है।