बुन्देलखण्ड का मांझी, अपनी ज़िद से 8 बीघा ज़मीन पर अकेले खोद डाला तालाब

न्यूज 24, राजेश सोनी, हमीरपुर(11 जुलाई): बूंद-बूंद पानी को तरस रहे पूरे बुंदेलखंड में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। सरकार करोड़ों रुपए पानी के लिए पानी की तरह बहा रही है। लेकिन, नतीजा वहीं ढाक के तीन पात वाली ही है। बुंदेलखंड इलाके में पानी संरक्षण के लिए सरकार तमाम तरह की कोशिशें कर रही है लेकिन, नतीजा सबके सामने हैं। मगर, इन सबके बीच एक अकेले शख्स ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो जल संरक्षण की दिशा में इलाके की पूरी तस्वीर बदल दी है। 

सिर पर पगड़ी, एक हाथ में फावड़ा और एक हाथ में तसला लिए ये हैं कृष्णानंद बाबा। ऊपर तस्वीर में आप देख सकते हैं कि बाबा पहले फावड़ा से मिट्टी खोदते हैं और फिर उसे तसला में भरकर उपर चले आते हैं। तकरीबन दो साल तक बाबा कुछ इसी तरह करते रहे और, लोग उन्हें पागल समझते रहे। लेकिन,  कृष्णानंद बाबा का एक ही जुनून था कि, चाहे जो हो जाए तालाब खोद कर ही दम लेंगे। इस शख्स ने हिम्मत नहीं हारी और रात-दिन तालाब खोदने की धुन सवार किए अपने काम में लगा रहा और, बाबा के तकरीबन दो साल के अथक प्रयास का ही नतीजा है कि आज ये तालाब लबालब भरा हुआ है जो इलाके के लोगों के लिए किसी जीवनदायिनी से कम नहीं है। 

बाबा ने इस काम को अकेले दम पर अंजाम तक पहुंचाया। एक फावड़ा और तसले के भरोसे तालाब खोदने का बीड़ा उठाने वाले कृष्णानंद बाबा के दिल में सिर्फ एक ही ख़याल था कि बुंदेलखंड में हर साल सूखा पड़ता है। गर्मी में हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरसने लग जाते हैं। तालाब, कुएं,  नदियां सब जवाब दे देते हैं। ऐसे हालात में अगर इस तालाब को गहरा खोद कर तैयार कर दिया जाए तो इसमें भी साल भर पानी भरा रहेगा। दरअसल, हमीरपुर में सुमेरपुर ब्लॉक के पचखुरा बुजुर्ग गांव का ये तालाब तकरीबन 200 साल पुराने हैं। जो लगातार सूखा रहता था। साल दर साल इसकी गहराई कम होती जा रही थी। जिसके बाद कृष्णानंद बाबा ने अकेले इस पुराने सूख पड़े तालाब को खोदने का बीड़ा उठाया।

आख़िरकार बाबा की कोशिश रंग लायी। अब  तालाब लबालब पानी से भरा है, हालांकि कृष्णानंद अब भी इस काम को पूरा नहीं मान रहे हैं। वे अब इसे मॉडल तालाब का सपना संजोये बैठे हैं और, प्रशासन से तालाब का अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे हैं। अब सवाल ये उठता है कि जब एक शख्स अपने भगीरथी कोशिश से इस तरह की जीवनदायिनी वाला काम कर सकते हैं। तो करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करने का दावा करने वाली सरकार और सरकारी तंत्र इस काम को क्यों पूरा नहीं कर पाती है।