जान पर खेलकर लोगों का ईलाज करने जाती है सुनीता

नई दिल्ली (8 मार्च): आज पूरी दुनिया विश्व महिला दिवस मना रही है। इस मौके पर आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताते हैं जो पिछले 7 साल से नदी पार कर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं। सुनीता दंतेवाड़ा के स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर तैनात है।

जिस नदी की गहराई और चौड़ाई देख लोगो के पैर कांपने लगते हैं, उसी उफनती और मगरमच्छों से भरी नदी को सुनीता खुद लकड़ी की बनी छोटी डोंगी चला कर पार करती है और लोगो तक मेडिकल सुविधा पहुंचाती है। वही इंद्रावती नदी पार करते ही माओवादियों का आतंक शुरू हो जाता है। सुबह घर से निकलने के बाद खुद इन्हें ये पता नहीं होता कि शाम तक ये सही सलामत घर तक पहुचेंगे की नहीं।

सुनीता लगभग 3 से 4 हजार ग्रामीणों को मेडिकल सेवाएं देती हैं। इस इंद्रवती नदी में मगरमच्छ 12 महीने डेरा डाले रहते हैं। बावजूद इसके सुनीता अपनी जान जोखिम में डालकर ग्रामीणों को मेडिकल सेवाएं मुहिया कराती हैं। इस दौरान सुनीता को 4 से 5 किलो का मेडिकल किट भी उठाना पड़ाता है। काम के दौरान सुनीता को नक्सलियों ने बंधक भी बनाया था, लेकिन फिर भी उनका ग्रामीणों की मदद करने का जज्बा कम नहीं हुआ।

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