फिर इंसानियत हुई शर्मसार, पैसों की तंगी के चलते कूड़े के ढेर से पत्नी के शव को जलाया

नीमच (6 सितंबर): मध्यप्रदेश से एकबार फिर इंसानियत को शर्मसार करने वाली खबर आई है। गरीबी की ऐसी तस्वीर आई है जिसे देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। एक दलित को पैसे नहीं होने की वजह से पत्नी की चिता टायर, कागज, प्लास्टिक और झाड़ियों से जलानी पड़ी।

सारे देश को विचलित करने वाली तस्वीर मध्यप्रदेश के नीमच से सामने आई है। यहां एक पति को अपनी पत्नी की लाश टायर, कागज, प्लास्टिक और झाड़ियों से जलानी पड़ी। मजबूर पति और उसकी मुफलिसी का आलम ये था कि उसके पास लकड़ी खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। इतना ही नहीं गांव की पंचायत ने भी इस जगदीश की कोई मदद नहीं की। ऐसे में पत्नी की मौत से दुखी जगदीश ने चिता के लिए 3 घंटे तक प्लास्टिक और कचरे जमा करता रहा।

एक तो अपनी पत्नी से जुदा होने का गम और दूसरा शव को गरिमापूर्ण विदा करने की जिम्मेदारी के आगे जगदीश पूरी तरह बिखर चुका था। गूंगे बहरे सिस्टम की मार से मजबूर, अपनी पत्नी की चिता को जलाने के लिए जगदीश के परिवार ने कई लोगों से मदद मांगी और लोगों ने अलग-अलग तरीके बताए। जगदीश के भाई के मुताबिक एक ने यहां तक कह दिया कि जब पैसे नहीं है तो शव नदी में बहा दो।

जगदीश भटकता रहा, जब पैसे पूरे नहीं हुए तो शव को दफन करने की ठानी लेकिन लोगों ने मना कर दिया। जगदीश की जेब में ढाई सौ रुपए थे और लड़की की कीमत ढाई हजार। सिस्टम की निचली इकाई से लेकर ऊपर तक दरवाजा खटखटाया लेकिन किसी ने नहीं सुनी, लेकिन जब ये खबर फैली तो सियासतदानों के बांछे खिल गई और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

यहां भी कालाहांडी की तरह, यहां भी छतरपुर की तरह, यहां भी मलकानगिरी की तरह मुर्दा सिस्टम जीत गया। समाज का एक ऐसा चेहरा सामने आया जिसे इंसानियत शर्मसार हो गई और देश का दलित, देश का गरीब कचरे जमा कर पत्नी की चिता जला दिया।

वीडियो:

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