नहीं मिली जगह तो दलित परिवार ने घर के सामने जलाई बहू की चिता

ग्वालियर (11 अगस्त): मध्‍य प्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि इंसान अपने फायदे के लिए किस हद तक गिर सकता है। यहां के एक गांव में श्मशान पर दबंगों ने कब्जा कर खेती कर ली। एक दलित परिवार के बुजुर्ग ने गांव के लोगों से अनुरोध किया कि कोई खाली पड़े खेत में बहू के अंतिम संस्कार करने की अनुमति दे दें, लेकिन सबने उसे दुत्कार कर भगा दिया। इस दौरान बहू का शव 24 घंटे घर में ही रखा रहा। मजबूरन दलित परिवार को बहू का अंतिम संस्कार घर के सामने ही करना पड़ा।   रसूखदारों ने अंतिम संस्कार के लिए श्मशान भी नहीं छोड़ा..... - मुरैना में अंबाह के गांव 'पारासर की गढ़ी' में रहने वाले पूरन माहौर का बेटा बबलू सूरत (गुजरात) में रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करता है। - बबलू की पत्नी संगीता की 8 अगस्त को TB से सूरत में मौत हो गई थी। बबलू 9 अगस्त की सुबह पत्नी का शव लेकर पैतृक गांव आ गया। - बबलू की पत्नी का शव अंतिम संस्कार के लिए रखा हुआ था, तभी पता चला कि गांव के श्मशान पर तो दबंगों ने बाजरा उगा रखा है। - इसके बाद बबलू और उसके पिता बहू के अंतिम संस्कार के लिए गांव के लोगों से उनके खाली पड़े खेत में थोड़ी सी जमीन की गुहार लगाते घूमते रहे। - बहू का शव 24 घंटे घर में ही रखा रहा, बबलू और उसका पिता गांव में भर में घूमने के बाद थकहार कर निराश हो गए। - आखिरकार मजबूरन बुधवार को घर के सामने ही बबलू को पत्नी की चिता जलानी पड़ी।

मुक्तिधाम की जमीन पर रसूखदारों का बाजरा... - गांव के सरपंच राय सिंह तोमर ने बताया कि मुक्तिधाम के लिए करीब 1 बीघा जमीन रिजर्व है, लेकिन गांव के कुछ लोग इस जमीन में जबरदस्ती फसल उगा रहे हैं। इस समय भी जमीन पर बाजरा की फसल है। - मजबूरी में गांव में किसी की मौत होने पर उसके परिजन अपने ही खेत में अंतिम संस्कार करते हैं। - सरपंच ने बताया कि मुक्तिधाम की जमीन से अतिक्रमण हटवाने के लिए वह तहसीलदार, नायब तहसीलदार व पटवारी सब को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। - सड़क पर अंतिम संस्कार की मजबूरी बताई गई तो जवाब मिला कोई कहीं भी अंतिम संस्कार करे प्रशासन क्या करें।