साइरस मिस्त्री टाटा संस के खिलाफ पहुंचे कंपनी ट्रिब्यूनल, कहा- नहीं हो सकता कोई समझैता

नई दिल्ली ( 20 दिसंबर ): टाटा संस के चेयरमैन के पद से अचानक अपदस्थ किए गए साइरस मिस्त्री ने समूह के अंतरिम चेयरमैन रतन टाटा के साथ किसी भी तरह के समझौते की संभावना से इनकार किया है। साइरस मिस्त्री ने इस मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण में टाटा संस के खिलाफ शिकायत की है। मिस्त्री ने अपनी शिकायत में कंपनी के बोर्ड स्तर पर कुप्रबंधन और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। साइरस मिस्त्री ने इस शिकायत में कंपनी कानून की धारा 241 का हवाला दिया है।

इस धारा के तहत किसी व्यक्ति को कंपनी के नुकसानदायक या वृहत सार्वजनिक हितों के खिलाफ उठाए गए कदमों की एनसीएलटी में शिकायत करने का अधिकार है। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड में गलत ढंग से किए गए बदलाव के खिलाफ अपील का अधिकार देती है। न्यायाधिकरण इस अपील पर 22 दिसंबर को सुनवाई करेगा।

मिस्त्री ने मंगलवार को कहा कि वह समूह में गवर्नेंस के मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 103 अरब डॉलर के इस ग्रुप से वह अपने परिवार की 18.5 पर्सेंट हिस्सेदारी को भी वापस नहीं लेंगे। मिस्‍त्री के इस फैसले के बाद टाटा संस ने भी नहीं झुकने का इशारा किया और कहा कि वह नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल में सायरस मिस्‍त्री के आरोपों पर जवाब देगा। टाटा संस ने कहा कि सायरस मिस्त्री की याचिका से रतन टाटा के प्रति उनकी गहरी कटुता का पता चलता है।

साइरस मिस्त्री के ट्राइब्यूनल पहुंचने पर टाटा संस ने बयान जारी कर कहा कि हमें कंपनीज ऐक्ट की धारा 241 और 242 के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल का नोटिस मिला है। हम समझते हैं कि इस याचिका को साइरस मिस्त्री की इनवेस्टमेंट कंपनियों की ओर से दायर किया गया है। समूह ने कहा, 'हमने कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों का पालन किया है। मिस्त्री की ओर से यह याचिका दुर्भाग्यपूर्ण है। यह टाटा समूह और जमशेदजी टाटा के मूल्यों के प्रति उनकी गैरजवाबदेही को दर्शाता है।'

इनवेस्टर में से सबसे अधिक है। मिस्त्री ने सोमवार को समूह की सभी 6 मुख्य कंपनियों से इस्तीफा देकर आश्चर्य में डाल दिया था, जबकि 24 दिसंबर को ही कुछ कंपनियों की ईजीएम होने वाली है, जिनमें उन्हें डायरेक्टरशिप से हटाने के लिए टाटा संस के प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है।