कैशलेस इकोनॉमी पर साइबर हमले का खतरा, माइक्रो-ATM, POS की सुरक्षा जरूरी

नई दिल्ली (4 दिसंबर): 500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी के बाद अब सरकार देश को कैशलेस बनाना चाहती है। लिहाजा सरकार देशभर में डेबिट,क्रेडिट और इ वॉलेट के साथ-साथ ऑनलाइन बैंकिंग को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में साइबर सुरक्षा को और दुरूस्त करने की जरूरत है। सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद माइक्रो-एटीएम और पीओएस काउंटर के बढ़ते इस्तेमाल के मद्देनजर देश की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-इन ने ग्राहकों, बैंकरों और व्यापारियों को इन प्रणालियों पर मालवेयर हमलों को लेकर आगाह करते हुए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उनसे उच्च एनक्रिप्शन तकनीक को अपनाने के लिए कहा है।

हैकिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने और भारतीय इंटरनेट डोमेन की सुरक्षा को मजबूत करने वाली नोडल एजेंसी सीईआरटी-इन ने माइक्रो-एटीएम,ऑटोमेटेड ट्रेलर मशीन और पीओएस :प्वाइंट ऑफ सेल: प्रणाली को लेकर दो परामर्श जारी किए हैं।0

हैकिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने और भारतीय इंटरनेट डोमेन की सुरक्षा को मजबूत करने वाली नोडल एजेंसी CIRT इन ने माइक्रो-ATM(ऑटोमेटेड ट्रेलर मशीन)और POS (प्वाइंट ऑफ सेल) को लेकर एडवाजरी जारी की है।  इसमें कहा गया है कि माइक्रो-ATM बहुत कम बिजली से चलते हैं और GPRS नेटवर्क के जरिये बैंकों के सर्वरों से जुड़ते हैं। एजेंसी ने ऐसे नेटवर्क की सुरक्षा विशेषताओं को मजबूत बनाने और अपडेट करने की जरूरत पर बल दिया है ताकि लोगों और बैंकों की गोपनीय जानकारी को हैक होने से बचाया जा सके।

परंपरागत रूप से POS प्रणाली में प्रविष्ट किये जाने वाले डेटा मेमोरी में होते हैं और गैर-एनक्रिप्टेड रूप में होते हैं, जिस कारण साइबर हमला करने वाले और डेटा चुराने की कोशिश करने वाले बहुत अधिक सफल हो सकते हैं।

इसमें साथ ही कहा गया है, जल्द से जल्द कार्ड के डेटा को एनक्रिप्ट करके और मशीन में अधिकतम समय तक एनक्रिप्ट सुनिश्चित करके इसके खतरों को कम किया जा सकता है। मेमोरी में डेटा एनक्रिप्ट करने से जुड़े मसले के समाधान के लिए प्वाइंट टू प्वांइट एनक्रिप्शन का प्रयोग किया जा सकता है।

एजेंसी ने ग्राहकों से डेबिट और के्रडिट कार्ड के पिन को लेकर सतर्कता बरतने और अनजान लोगों के साथ विवरण साझा नहीं करने का सुझाव दिया है।