गोल्ड मेडल का दूसरा नाम हैं मुक्केबाज मेरी कॉम

नई दिल्ली(14 अप्रैल): ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में जारी 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में आज का पहला मेडल बॉक्सर मेरी कॉम ने दिलाया। उन्होंने आज भारत को 18वां गोल्ड दिलाया। मेरी कॉम की इस जीत के साथ ही भारत ने आज 6 गोल्ड मेडल जीत लिए। 35 साल की इस बॉक्सर ने कुछ महीने पहले ही पांचवा एशियन चैंपियनशिप गोल्ड मेडल जीता था। 
 

कॉमनवेल्थ गेम्स ही एक प्रतियोगिता है जिसमें मेरी कॉम ने अब तक मेडल नहीं जीता था। मेरी कॉम की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर नज़र डालें तो सुबह-सुबह अगर वे दिल्ली में राष्ट्रीय कैंप में ट्रेनिंग करती हैं तो वहां से सीधे संसद सत्र पहुंती हैं ताकि बतौर सांसद वो राज्य सभा की कार्यवाही में हिस्सा ले सकें और उनके नाम के आगे ऐबसेंट न लिखा जाए।

मेरी बॉक्सिंग रिंग के अंदर जितना जुझारू हैं, असल ज़िंदगी की मुश्किलों का भी उन्होंने डट कर सामना किया है। 2011 में मेरी कॉम के साढ़े तीन साल के बेटे के दिल का ऑपरेश्न होना था। उसी दौरान मेरी कॉम को चीन में एशिया कप के लिए जाना था। फ़ैसला मुश्किल था। आख़िरकर मेरी कॉम के पति बेटे के साथ रहे और मेरी कॉम एशिया कप में गईं और गोल्ड मेडल जीतकर लाईं। लेकिन ये उनके लिए आसान नहीं था। मेरी कॉम पाँच बार विश्व चैम्पियन रह चुकी हैं और बॉक्सिंग में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्हें कांस्य मिला था। मणिपुर में एक ग़रीब परिवार में जन्मी मेरी कॉम के परिवार वाले नहीं चाहते थे कि वो बॉक्सिंग में जाए। बचपन में मेरी कॉम घर का काम करती, खेत में जाती, भाई बहन को संभालती और प्रैक्टिस करती। 

दरअसल डिंको सिंह ने उन दिनों 1998 में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था। वहीं से मेरी कॉम को भी बॉक्सिंग का चस्का लगा। काफ़ी समय तक तो उनके माँ-बाप को पता ही नहीं था कि मेरी कॉम बॉक्सिंग कर रही है। साल 2000 में अख़बार में छपी स्टेट चैंपियन की फोटो से उन्हें पता चला। पिता को डर था कि बॉक्सिंग में चोट लगी तो इलाज कराना मुश्किल होगा और शादी में भी दिक्कत होगी। लेकिन मेरी कॉम नहीं मानी। मां-बाप को ही ज़िद्द माननी पड़ी। मेरी ने 2001 के बाद से तीन बार वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती। इसी बीच मेरी कॉम की शादी हुई और दो जुड़वा बच्चे भी।

पांच बार की विश्व चैम्पियन मेरीकॉम ने अपने आखिरी दो विश्व चैम्पियनशिप मेडल और ओलंपिक पदक मां बनने के बाद जीते। 2012 ओलंपिक में तो चुनौती ये भी थी कि मेरी कॉम को अपने भारवर्ग 48 किलोग्राम के बजाय 51 किलोग्राम वर्ग में खेलना पड़ा था। इस वर्ग में उन्होंने सिर्फ़ दो ही मैच खेले थे। 

मेरी कॉम ने करियर में बुरे दिन भी देखे जब वो 2014 में ग्लासगो में क्वालीफाई नहीं कर पाई और न ही रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई कर पाई थीं। वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन, ओलंपिक चैंपियन, सांसद, बॉक्सिंग अकादमी की मालिक, खेलों के लिए सरकारी पर्यवेक्षक, माँ और पत्नी ..मेरी कॉम कई रोल एक साथ निभाती हैं और हर काम में उतनी ही लगन जितनी लगन से वो रिंग में खेलती हैं।