Blog single photo

'कैशलेस इकोनॉमी' को झटका, नकदी का स्तर 18 लाख करोड़ रुपये के पार

देश की इकॉनमी को कैशलेस बनाने के रास्ते पर चल रही मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। दरअसल नोटबंदी के बाद जनता के हाथ में नकदी सिमट कर करीब 7.8 लाख करोड़ रुपये रह गई थी।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 10 जून ): देश की इकॉनमी को कैशलेस बनाने के रास्ते पर चल रही मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। दरअसल नोटबंदी के बाद जनता के हाथ में नकदी सिमट कर करीब 7.8 लाख करोड़ रुपये रह गई थी। लेकिन आरबीआई के रिपोर्ट के मुताबिक देश में इस समय जनता के हाथ में नकदी का स्तर 18.5 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है जो अब तक का अधिकतम स्तर है। यह नोटबंदी के दौर की तुलना में दोगुने से अधिक है।

चलन में मौजूद कुल मुद्रा में से बैंकों के पास पड़ी नकदी को घटा देने पर पता चलता है कि चलन में कितनी मुद्रा लोगों के हाथ में पड़ी है। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले देश के विभिन्न हिस्सों में नकदी संकट खबरें आई थी जबकि इसके विपरीत लोगों के पास बड़ी मात्रा में नकदी मौजूद है। आंकड़ों के मुताबिक , ' जनता के पास मुद्रा ' और ' चलन में मुद्रा ' दोनों नोटबंदी के फैसले से पहले के स्तर से अधिक हैं।

सरकार के नोटबंदी के फैसले से चलन में मौजूद कुल मुद्रा में मूल्य के हिसाब से 86 प्रतिशत मुद्रा अमान्य हो गयी थी। सरकार ने इन पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों के चलन पर 8 नवंबर 2016 को पाबंदी घोषित कर दी थी पर लोगों को अपने पास पड़े बड़े मूल्य के नोटों को बैंकों में जमा करने के लिए समय दिया था। जिसके बाद करीब 99 प्रतिशत मुद्रा बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गई थी। 

आरबीआई द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कुल 15.44 लाख करोड़ रुपये की अमान्य मुद्रा में से 30 जून 2017 तक लोगों ने 15.28 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा बैंकों में जमा करवाई। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई 2018 तक लोगों के पास 18.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मुद्रा थी, जो कि एक वर्ष पहले की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। यह 9 दिसंबर 2016 के आंकड़े 7.8 लाख करोड़ रुपये के दोगुने से अधिक है। 

Tags :

NEXT STORY
Top