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कराची हमला: महिला पुलिस अफसर ने जान पर खेलकर बचाई चीनी स्टाफ की जान

शुक्रवार को कराची में जब आधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों ने चीन के वाणिज्य दूतावास पर हमला बोला तो एक बहादुर महिला पुलिस अधिकारी ने अपनी जान पर खेलकर मिशन के कई स्टाफ की जान बचाई। वरिष्ठ सुपरिंटेंडेंट पुलिस सुहाई अजीज तालपुर की अगुआई में सुरक्षाकर्मियों ने आतंकियों के इस हमले को नाकाम कर दिया। महिला अफसर ने सुनिश्चित किया कि 9 हैंड-ग्रेनेडों, असॉल्ट राइफलों समेत बड़ी मात्रा में विस्फोटकों के साथ आए आतंकी वाणिज्य दूतावास की बिल्डिंग के भीतर डिप्लोमेटिक स्टाफ के करीब न पहुंच सकें। पुलिस ने बताया है कि आतंकियों के पास खाने के सामान और दवाइयां भी थीं, जिससे साफ है कि वे बंधक बनाने के इरादे से आए थे। आपको बता दें कि हमले की जिम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 नवंबर): शुक्रवार को कराची में जब आधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों ने चीन के वाणिज्य दूतावास पर हमला बोला तो एक बहादुर महिला पुलिस अधिकारी ने अपनी जान पर खेलकर मिशन के कई स्टाफ की जान बचाई। वरिष्ठ सुपरिंटेंडेंट पुलिस सुहाई अजीज तालपुर की अगुआई में सुरक्षाकर्मियों ने आतंकियों के इस हमले को नाकाम कर दिया। महिला अफसर ने सुनिश्चित किया कि 9 हैंड-ग्रेनेडों, असॉल्ट राइफलों समेत बड़ी मात्रा में विस्फोटकों के साथ आए आतंकी वाणिज्य दूतावास की बिल्डिंग के भीतर डिप्लोमेटिक स्टाफ के करीब न पहुंच सकें। पुलिस ने बताया है कि आतंकियों के पास खाने के सामान और दवाइयां भी थीं, जिससे साफ है कि वे बंधक बनाने के इरादे से आए थे। आपको बता दें कि हमले की जिम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली है।

बता दें कि सुहाई अजीज तालपुर जब बच्ची थी तो प्राइवेट स्कूल में दाखिला लेने के कारण उसके अपनों ने ही छोड़ दिया था, आज पूरे पाकिस्तान में उसकी तारीफ हो रही है। जी हां, गांव की वह बच्ची अब कराची पुलिस की महिला अफसर बन चुकी है। 

2013 में पुलिस बल में हुईं शामिल पुलिस ने बताया कि आतंकवादियों के पास खाद्य सामग्रियां एवं दवाइयां भी थीं जिससे लगता है कि वह उन्हें बंधक बनाने की फिराक में थे. लेकिन जैसे ही वह दूतावास के द्वार तक पहुंचे पुलिस टीम ने जवाबी कार्रवाई की. गोलीबारी में दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई लेकिन सभी हमलावर मारे गए. एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक सुहाए सिंध प्रांत के तंडो मुहम्मद खान जिले के भाई खान तालपुर गांव के एक मध्यम वर्गीय परिवार से आती हैं. 2013 में सेंट्रल सुपरियर सर्विसेज एग्जाम पास करने के बाद वह पुलिस बल में शामिल हुई थीं.  

परिवार को समाज के ताने के चलते छोड़ना पड़ा था गांवउन्हें पढ़ाने को लेकर उनके रिश्तेदारों ने उनके परिवार को इतने ताने मारे थे कि उनके परिवार को गांव छोड़ कर दूसरे कस्बे में जाकर बसना पड़ा। उनके पिता अजीज तालपुर एक राजनीतिक कार्यकर्ता एवं लेखक थे और उन्होंने अपनी बेटी के लिए बड़े सपने देखे थे।

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