बकरीद पर घाटी में रहेगा कर्फ्यू, ड्रोन से रखी जाएगी नजर

आसिफ सुहाफ, श्रीनगर (12 सितंबर): बकरीद के मौके पर प्रशासन ने कश्मीर घाटी के 10 जिलों में कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है और ड्रोन से पूरे इलाके पर नजर रखी जाएगी। बकरीद के मौके पर पूरे देश में रौनक है, बकरों का बाजार सज गया है, लेकिन कश्मीर में सन्नाटा पसरा हुआ है। घाटी में जिस तरह के हालात हैं, उसमें शायद ही लोग बकरीद का जश्न मना सकें।

कश्मीर घाटी में पिछले दो महीने में हिंसा, पत्थरबाजी और सुरक्षाबलों की गाड़ियों की साइरन ही घरों में बंद लोगों को खिड़कियों से दिखाई और सुनाई दे रहे हैं। पिछले 65 दिनों से बंद और कर्फ्यू ने घाटी के लोगों को बेहाल कर दिया है, जो बाजार बकरीद के मौके पर पूरी तरह सज जाते थे, जहां पैर रखने तक की जगह नहीं होती थी। वो आज वीरान पड़े हैं। श्रीनगर के लाल चौक पर सुरक्षाबलों का कड़ा पहरा है। सिर्फ पक्षी ही जमीन से आसमान और आसमान से जमीन पर आते-जाते दिख रहे हैं।

कश्मीर घाटी के लोग परेशान हैं कि मंगलवार को बकरीद कैसे मनाएं। घर के बाहर सुरक्षाबलों का कड़ा पहरा, ऊपर से अलगाववादियों का बंद। ऐसे में श्रीनगर के लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि बकरीद कैसे मनाएं? श्रीनगर में बाजार पूरी तरह से बंद हैं। कभी-कभार हुर्रियत नेताओं की ओर से शाम को हड़ताल में ढील दी जाती है। लेकिन सिर्फ कुछ देर के लिए, तब भी पत्थरबाज और हुडदंगी आकर बाजार को बंद करवा देते हैं।

बकरीद के मौके पर किसी जानवर की कुर्बानी देनी की परंपरा है। श्रीनगर के डाउन- टाउन इलाके का ये बड़ा मैदान ईदगाह के नाम से मशहूर है। ये मैदान कुर्बानी के जानवरों से भरा रहता था। लोग अपनी हैसियत के हिसाब से जानवर खरीदते थे। गरीब लोग साल भर मेड़ या बकरे पालते थे और बकरीद के मौके अपने जानवरों को बेचकर मोटी कमाई करते थे, लेकिन घाटी की बदली फिजा में लाखों लोगों के अरमानों पर पानी फेर दिया।

कश्मीर घाटी के लोग इस सोच में डूबे हैं कि जब पूरा हिंदुस्तान बकरीद का जश्न मना रहा होगा, तब वो अपने घरों में बैठे चुपचाप खिलड़ियों से वीरान सड़क की ओर देख रहे होंगे। कश्मीर के अमन-चैन को आग लगाने वाले अलगाववादियों और आतंकियों को कोस रहे होंगे, जिनकी वजह से पिछले 65 दिनों से घाटी के लोगों की जिंदगी नर्क बनी हुई है, जिनकी वजह से बकरीद पर बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है?