क्यूबा में एक युग का अंत, फिदेल कास्त्रो इंदिरा को क्यों मानते थे अपनी बड़ी बहन ?


दिल्ली (26 नवंबर):
क्यूबा में एक युग का अंत हो गया है। क्यूबा के पूर्व-राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का 90 साल की उम्र में निधन हो गया। फिदेल कास्त्रो के दौर से ही भारत और क्यूबा के बच अच्छे संबंध रहे हैं। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह की माने तो फिदेल कास्त्रो इंदिरा गांधी को अपनी बड़ी बहन मानते थे।

दरअसल फिदेल कास्त्रो 1983 में गुट निरपेक्ष समिट में शामिल होने दिल्ली आए थे। कांग्रेस नेता और पूर्व विदेशमंत्री नटरवर सिंह के मुताबिक कास्त्रो एक महान नेता ही नहीं थे बल्कि एक विचार थे।

नटवर सिंह के मुताबिक मैं दिल्ली समिट के वक्त उनसे (फिदेल) कई बार मिला था। समिट में फिदेल के अलावा यासिर अराफात भी शामिल हुए थे। समिट का सेशन शुरू होना था। सेशन को जार्डियन डेलिगेशन के बाद अराफात को शुरू करने को कहा गया था। इससे वे नाराज हो गए और अपमानित महसूस करने लगे। नौबत इस हद आ गई कि उन्होंने अपने एयरक्रॉफ्ट के क्रू को दिल्ली छोड़ने के लिए तैयार रहने तक को कह दिया था। मैंने फौरन इंदिरा गांधी को इस बारे में बताया। इसके बाद इंदिराजी ने कास्त्रो को विश्वास में लिया। वे कुछ ही देर में विज्ञान भवन आ गईं। साथ ही कास्त्रो को भी मैंने इसकी जानकारी दी। उन्होंने अराफत से विज्ञान भवन आने को कहा। तब मैंने देखा कि कैसे उन्होंने अराफात को हेंडल किया? अराफात भी तुरंत विज्ञान भवन आ गए। उनके बीच बातचीत होने लगी। अराफात ने कास्त्रो से पूछा कि क्या इंदिरा गांधी आपकी दोस्त है? कास्त्रो ने जवाब दिया-"दोस्त, दोस्त, वह मेरी बड़ी बहन है और मैं उसके लिए कुछ भी करूंगा।"


फिदेल कास्त्रो 1976 से 2008 तक यानी 32 क्यूबा के प्रेसिडेंट रहे। 2008 में तबीयत खराब होने की वजह से उन्होंने राष्ट्रपति पद छोड़ा दिया और अपने भाई राउल कास्त्रो को सत्ता सौंप दी। 

1959 में कास्त्रो, रेवोल्यूशन के जरिए अमेरिका सपोर्टेड फुल्गेंकियो बतिस्ता की तानाशाही को उखाड़ फेंक सत्ता में आए थे। उसके बाद वह क्यूबा के पीएम बन गए और 1976 तक इस पोस्ट पर रहे। कास्त्रो 1976 से 2008 तक क्यूबा के प्रेसिडेंट भी रहे।

फिदेल का दावा था कि 634 बार उनकी मौत की साजिश रची गई। ये साजिश मुख्य रूप से अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के द्वारा रची गई थी। उनका कहना था कि जान लेने के लिए जहरीली दवाओं, जहरीले सिगार, विस्फोटक और जहरीले पाउडर से लेकर तमाम तरह की चीजों का इस्तेमाल किया गया।

1960 के दशक में दोनों के बीच रिलेशन टूट गए। 1959 में कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन के बाद अमेरिका ने क्यूबा पर बैन लगा दिया। इस बैन से अमेरिका को सालाना 1.2 बिलियन डॉलर नुकसान हुआ। 2014 में ओबामा ने दोनों देशों के बीच इकोनॉमिक और डिप्लोमेटिक रिलेशन सुधारने की बात कही।
करीब एक साल तक कनाडा और वेटिकन में दोनों देशों के बीच खुफिया बातचीत हुई। खुद पोप फ्रांसिस इसमें इन्वॉल्व थे। बातचीत का मकसद क्यूबा से आतंक को बढ़ावा देने वाले देश का ठप्पा हटाना, क्यूबा में यूएस सिटिजन आने पर लगी रोक को हटाना और इकोनॉमिक बैन हटाना था। अगस्त 2015 में अमेरिका ने क्यूबा में अपनी एम्बेसी फिर से शुरू की।