शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार को बेटी ने दी मुखाग्नि, 15 अगस्त को तिरंगा फहराने के बाद 2 आतंकी ढ़ेर किए

नई दिल्ली (17 अगस्त): 15 अगस्त को देश एक तरफ आजादी मिलने के 70 साल की खुशी मना रहा था। वहीं इसी दौरान श्रीनगर के नौहट्टा चौक पर सोमवार को आतंकी हमले में CRPF के कमांडेंट प्रमोद कुमार दो आतंकियों को अकेले मार गिराने के बाद शहीद हो गए। उनका शव गलवार को मिहिजाम लाया गया। यहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। 6 साल की बेटी ने उन्हें मुखाग्नि दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को हमले से पहले ही उन्होंने अपनी टुकड़ी से इंडिपेंडेंस-डे परेड की सलामी ली थी। कुछ ही देर बाद हमले की खबर आई और कुमार ने मोर्चा संभाल लिया। दो आतंकियों को अकेले मार गिराने के बाद वे शहीद हो गए। 11 दिन पहले भी उन पर पेट्रोल बम से हमला हुआ था।

- प्रमोद कुमार ने उस दिन शहादत दी, जिस दिन देश 70वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा था। उन्होंने सुबह 8.29 बजे तिरंगा फहराया, उसके बाद अपने साथी जवानों को संबोधित किया। - उन्होंने कहा था, ''हमारी जिम्मेदारियां काफी बढ़ गई हैं। चुनौती आतंकवादी और पत्थरबाज हैं। इनसे डट कर मुकाबला करना है और हम करेंगे। ये आपकी कड़ी मेहनत से संभव है। इसे पूरी लगन से करना होगा।'' - इसके एक घंटे बाद सुबह 9.29 बजे उनकी आतंकियों के साथ मुठभेड़ शुरू हो गई। टीम को वही लीड कर रहे थे। - कुमार उस घर में घुसे जहां से आतंकी फायर कर रहे थे। बेहद करीब पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी गन से दो आतंकियों को मार गिराया। - सुबह करीब 11 बजे परिवार के पास फोन आया कि कमांडेंट प्रमोद को सिर में गोली लगी है और उन्हें बचाया नहीं जा सका। - शहीद कमांडेंट मूल रूप से बिहार के बख्तियारपुर के रहने वाले थे। उनका जन्म 15 अक्तूबर 1972 को हुआ था। वे जामताड़ा में पले-बढ़े। - यहां उनके पिता रेलवे में थे। परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी और सात साल की एक बेटी है।