कोमा से बाहर आए चेतन चीता, हो सकते हैं डिस्चार्ज


नई दिल्ली(5 अप्रैल): जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हुए CRPF कमांडेंट चेतन चीता दो महीने कोमा में रहने के बाद होश में आ गए हैं।


- ट्रॉमा सर्जरी व क्रिटिकल केयर के प्रफेसर डॉ. अमित गुप्ता ने कहा, 'हम बुधवार को चीता को घर भेजने की योजना बना रहे हैं।' घायल हालत में चीता को पहले श्रीनगर के आर्मी अस्पताल ले जाया गया था जहां उनकी ब्लीडिंग रोकने के लिए दवाइयां दी गईं। हालांकि चोटों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें एयर ऐंबुलेंस के जरिए AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाने का फैसला किया गया।


- डॉक्टर्स ने बताया कि एडमिट करने के 24 घंटे के अंदर सर्जरी कर उनकी खोपड़ी के एक हिस्से पर दबाव कम किया गया। उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए हेवी ऐंटीबायॉटिक्स दिए गए और घाव लगातार साफ किए गए। एक बार स्थिर होने के बाद उनकी चोटों के इलाज के लिए अलग-अलग टीमें बना दी गईं। नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम ने उनकी बाईं आंख का ध्यान रखा। उनकी दाईं आंख ठीक नहीं की जा सकी। हड्डी के डॉक्टरों ने फ्रैक्चर्स पर काम किया, वहीं ऐंटीबायॉटिक थेरपी के लिए भी विशेषज्ञ ने उनकी देखरेख की।


- बता दें कि 14 फरवरी को बांदीपुरा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में चीता घायल हो गए थे। इस मुठभेड़ में 3 जवानों की मौत हो गई थी। इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खबर के बाद सुरक्षा बलों ने सर्च अभियान चलाया था लेकिन इस अभियान की जानकारी आतंकियों को पहले ही मिल गई थी इसलिए उन्होंने अपना ठिकाना बदल लिया था। चीता इस अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। जब चीता आतंकियों के नए ठिकाने के पास पहुंचे तभी उन पर आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। चीता पर 30 राउंड गोलियां चलाई गईं, जिनमें से 9 गोलियां उन्हें लगीं। घायल होने के बावजूद चीता ने आतंकियों पर फायरिंग जारी रखी और लश्कर के खूंखार आतंकी अबू हारिस को ढेर कर दिया।