IIT के साथ मिलकर आतंकियों की साजिश को नाकाम करेगी सेना

नई दिल्ली (19 जनवरी): 30 नवंबर 2016 को सांबा में हुए आतंकी हमले के बाद बीएसएफ ने एक सुरंग खोज निकाली थी। कहा जाता है कि आतंकी इसी सुरंग के जरिए बॉर्डर पार करके भारतीय सीमा में घुसे थे। लेकिन अब आतंकियों की साजिश को नाकाम करने के लिए आईआईटी ने एक बड़ी खोज की है।

जुलाई 2012 में भी सांबा सेक्टर में बीएसएफ ने एक 340 मीटर लंबी सुरंग को खोजा था। जो पठानकोट एयरबेस से 58 किलोमीटर दूर थी। 2001 से 2016 के बीच 8 सुरंगों का पता लगाया जा चुके हैं, जिनका उपयोग आतंकी भारत में घुसपैठ करने के लिए किया करते थे।

अब सुरंग के जरिए घुसपैठ को रोकने के लिए आईआईटी बेंगलुरु की नेशनल सेंटर फॉर एक्सीलैंस इन टेक्नोलॉजी फॉर इंटरनल सर्विस (NCETIS) अन्य आईआईटी के साथ मिलकर काम करेगी। ये 920 MHZ की ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) बनाएंगे जो टनल के अलावा जमीन में बिछे लैंडमाइन का भी पता लगाएगा।एक अंग्रेजी अखबार को NCETIS की परियोजना प्रबंधक सीमा पारीवाल ने बताया कि हम उपकरण का परीक्षण कर रहे है। सभी इलाको और परिस्थितियों में परीक्षण पूरा हो जाता है तो फरवरी में हम का क्षेत्र परीक्षण शुरू कर देंगे।

इसी के साथ सरकार एक ऐसी यंत्र भी जाती है जो 300 से 1200 मीटर की दूरी से चलने वाली गोली की एक सेकेंड में जानकारी देगी।