कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाते हरियाणा, पंजाब

नई दिल्ली(15 अक्टूबर): दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से फसलों के अवशेष जलाने पर लगाए गए प्रतिबंध और ऐसा न करने की चेतावनी जारी करने के बावजूद पंजाब और उत्तरी हरियाणा में यह काम जोरों पर है। ऐसा नासा के उपग्रह से मिली तस्वीर से जाहिर होता है।

- उपग्रह से मिली जानकारी यह बताती है कि अवशेष को जलाए जाने का काम साल की शुरुआत से चल रहा है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान दिल्ली को होगा जहां की एयर क्वॉ़लिटी 2015 की तुलना में ज्यादा खराब हो जाने की आशंका है। 

- पंजाब और हरियाणा में जाड़े के मौसम में खेत को साफ करने के लिए धान के ठूंठ धड़ल्ले से जलाए जा रहे हैं। जिससे वायु प्रदूषण का खतरा इस क्षेत्र में बढ़ गया है। दिल्ली-एनसीआर में अक्टूबर-नवंबर में एयर क्वॉलिटी के गिरने की यह मुख्य वजह है।

- नासा के अर्थ ऑब्जर्वेशन सिस्टम डेटा ऐंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम (ईओएसडीआईएस) वेबसाइट में बुधवार को तस्वीर जारी की गई है जिसमें पंजाब और उत्तरी हरियाणा में उन जगहों को रेखांकित किया गया है जहां फसलों की कटाई के बाद ठूंठ जलाए जा रहे हैं। इसमें दिखाया गया है कि 8 अक्टूबर से एक ही तरह से उन्हीं स्थानों में इन्हें जलाया जा रहा है।

- उल्लेखनीय 6 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान के मुख्य सचिवों को चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि अगर अवशेषों को जलाना जारी रहा तो उन्हें इसके लिए जिम्मेवार माना जाएगा।

- सेंट्रल पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक, इस पूरे सप्ताह दिल्ली की एयर क्वॉलिटी बेहद खराब रही है। हालांकि, एसएएफएआर के वैज्ञानिक का कहना है कि आग जलाने से दिल्ली की एयर क्वॉलिटी तत्काल प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा, ' यह हवा की दिशा, इसकी रफ्तार और तापमान पर निर्भर करेगा। इसमें 8-10 दिन का वक्त लग सकता है।'

- इधर, दिल्ली सरकार के कुछ अधिकारियों ने भी उपग्रह की तस्वीर का हवाला दिया है लेकिन उनका कहना है कि उन्होंने इससे पहले ही पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सरकार से अपील करते हुए अवशेषों के जलाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

- दिल्ली सरकार ने 4 अक्टूबर को इस संबंध में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को खत लिखा था। इस संबंध में पर्यावरण विभाग के एक अधिकारी ने कहा, 'सरकार ने इस मुद्दे को संबंधित राज्यों के समक्ष उठाया है। हाई कोर्ट ने भी राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए हैं। मुझे नहीं पता कि इस संबंध में और क्या किया जा सकता है।'

- सुप्रीम कोर्ट गठित पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने 7 अक्टूबर को संबंधित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर फसलों के अवशेष न जलाने के निर्देश दिए थे। ईपीसीए के प्रमुख भूरे लाल ने इस संबंध में कई निर्देश जारी किए थे। ईपीसीए ने कानून का उल्लंघन करने वालों को दंडित किए जाने और साथ किसानों के लिए जागरूकता अभियान शुरू करने के भी निर्देश दिए थे।

- इस संबंध में पूछे जाने पर उत्तरी हरियाणा के एक किसान ने 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से कहा कि सरकार ने फसलों के अवशेष को जलाने के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है लेकिन इनके निपटान के लिए कोई विकल्प मौजूद नहीं है।