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नौ साल बाद पुलिस ने हत्या के आरोपी को किया गिरफ्तार

एक पुरानी कहावत है अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो गलती तो कर ही जाता है, जिससे वो एक दिन अपने असली मुकाम यानी जेल की सलाखों के पीछे पहुच ही जाता है।

विमल कौशिक, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(7 अक्टूबर): एक पुरानी कहावत है अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो गलती तो कर ही जाता है, जिससे वो एक दिन अपने असली मुकाम यानी जेल की सलाखों के पीछे पहुंच ही जाता है। दिल्ली में एक अपराधी अपने किए गए अपराध से बच नहीं पाया। दरअसल साल 2011 में गायब हुए एक युवक की मौत की खौफनाक सच्चाई 2019 में सामने आई है।दिल्ली के कापसहेड़ा इलाके से  साल 2011 में किडनैप हुए एक शख़्स की हत्या की गुत्थी को 9 साल बाद सुलझा लिया गया है। 

इन सालों में पुलिस ने आरोपी कमल का ब्रेन मैपिंग और पॉलिग्राफिक टेस्ट भी कराया, लेकिन कमल इतना शातिर की तमाम फोरेंसिक एक्सपर्ट और डॉक्टर्स को भी गच्चा दे गया। आखिरकार उसने गायब होकर पुलिस के शक को पुख्ता कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने जहां आरोपी काम करता था तो वहां छानबीन की तो खौफनाक मर्डर मिस्ट्री सामने आई। दरअसल कापसहेड़ा इलाके में अपनी पत्नी के साथ रहने वाले 22 साल के रवि की नौ साल बाद टुकड़ों में लाश बरामद की गई है। 

रवि को मार कर उसकी लाश के कई टुकड़े किये गए और दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर दूर अलवर में उन्हें पांच फीट के गड्डे में दबा दिया गया था, लेकिन जब आरोपी को पता चला कि मामला दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को दिया गया है तो आरोपी ने उन टुकड़ो को निकाला और एक गाड़ी के सहारे जाते हुए 70 किलोमीटर के सफर में टुकड़ों को गिराता हुआ चला गया। दरअसल इस कहानी की शरूआत साल 2010 में हुई। कमल अलवर जिले में कंस्ट्रक्शन का काम करता था। वहीं पास में रहने वाली लड़की शुकुन्तला से कमल को प्यार हो गया, लेकिन शुकुन्तला के घर वालों ने उसकी शादी रवि से करवा दी। रवि दिल्ली के समालखा का रहने वाला था और ऑटो चलाकर अपनी गुजर बसर कर रहा था।  

शादी के बाद शुकुन्तला रवि के साथ सिर्फ एक दिन ही रही और वो अपनी मायके चली गयी। करीब डेढ़ महीने के बाद  कमल ने उससे कहा कि वो अपने पति के घर जाय और रवि को किसी बहाने से घर से बाहर लेकर आये। शुकुन्तला फिर से अपने पति के घर पहुंची और अपने पति को बहन के घर ले जाने के बहाने से बाहर निकली। रवि और शकुंतला कमल की गाड़ी में बैठ कर निकले कमल की गाड़ी उसका ड्राइवर गणेश चला रहा था। दोनों ने रवि से दोस्ती कर ली। जिसके बाद कमल ने पहले शुकुन्तला को उसकी बहन के घर उतारा। फिर गाड़ी में ही रस्सी के सहारे रवि की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद कमल और गणेश रवि की लाश को उसी गाड़ी में लेकर दिल्ली से 200 किलोमीटर दूर अलवर पहुंचे।

 इसके बाद रवि की लाश को  उसी जगह दफन कर दिया जहां कमल की  कंस्ट्रक्शन साइट थी। लेकिन जैसे ही जानकारी मिली कि केस क्राइम ब्रांच सौप दिया गया है तो कमल ने लाश को ठिकाने लगाने के लिए एक योजना बनाई। जिसके बाद उसने शव के टुकड़ो को इकट्ठा किया और ट्रक में बैठकर 70 किलोमीटर तक सफर किया और इस सफर में वो हर 2-3 किलोमीटर के अंतर से टुकड़ा फेंकता चला गया। पुलिस ने जब रवि के अचानक से गायब होने के मामले की जांच शूरी की तो उसे शुरुवात से ही कमल और शकुंतला पर शक हो गया था।

पुलिस को कमल ओर उसके साथियो पर शक तो था। लेकिन बिना पुख्ता सबूत के पुलिस भी लाचार थी। सबूतों को हासिल करने के लिए पुलिस ने कमल का पोलीग्राफी टेस्ट कराया। लेकिन कमल इतना शातिर तरीके से अपनी साजिश में आगे बढ़ रहा था कि उसने डॉक्टर्स और एक्सपर्ट को पूरी तरीके से गच्चा दे दिया। इस टेस्ट से पुलिस खाली हाथ मसलते रह गयी।पुलिस ने हिम्मत नहीं हारी और कोर्ट से नार्को के लिए सहमति मांगी। लेकिन आरोपी कमल ने नार्को के लिए अपनी सहमति नहीं दी। 

पुलिस ने कमल का गुजरात के गांधी नगर की फॉरेंसिक लैब में ब्रेन मैपिंग करवाया। लेकिन यहाँ भी पुलिस को बहुत ज्यादा फायदा नही मिला। लेकिन डॉक्टरों की टीम ने अपना ये ऑब्जर्वेशन दिया कि वो ब्रेन मैपिंग में लगतार चकमा दे रहा था। जिसके बाद पुलिस ने कमल पर शिकंजा कसना शुरू किया तो कमल और तमाम आरोपी रातोरात फरार हो गए।इसी बीच फिर पुलिस ने काफी तलाश के बाद कमल ओर उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया। जबकि मृतक की पत्नी शकुंतला अब भी फरार है। पुलिस के मुताबिक लाश की 25 हड्डियों को बरामद किया गया है। जिन्हें डीएनए जांच के लिए भेजा गया है।

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