गोवध पर बैन से क्रिकेट को किस तरह हो रहा नुकसान, जानिए...

नई दिल्ली (5 जुलाई) : उत्तर भारत में पशुओं के अवैध ट्रांसपोर्टेशन पर कार्रवाई तेज़ होने का असर क्रिकेट पर भी पड़ रहा है। आप कहेंगे कि इन दोनों के बीच भला क्या कनेक्शन है। दरअसल, अवैध चमड़ा आसानी से उपलब्ध ना होने की वजह से क्रिकेट बॉल्स बनाने वाली इंडस्ट्री को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका नतीजा ये है क्रिकेट बॉल्स की कीमतों में दुगने का इज़ाफ़ा हो गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक क्रिकेट बॉल्स का निर्माण करने वाली मेरठ की एक फर्म के डायरेक्टर ने कहा कि यहां के हालात मुश्किल होने की वजह से हमें इंग्लैंड से चमड़ा मंगाना पड़ रहा है। इम्पोर्ट ड्यूटी और अन्य टैक्सों की वजह से ये बहुत महंगा पड़ता है। नतीजा ये है कि इसका नुकसान क्रिकेट बॉल्स खरीदने वालों पर पड़ रहा है। क्रिकेट बॉल जो एक साल पहले 400 रुपए में बिकती थी अब 800 रुपए में बिक रही है।  

ये उद्योग काऊ लैदर (गाय की खाल) पर आधारित है जो कि जिन राज्यों में गोवध पर प्रतिबंध नहीं है वहां से वैध तौर पर हासिल किया जाता है। जिन राज्यों में इस पर प्रतिबंध है, वहां से अवैध तौर पर भी चोरी-छिपे इसकी आपूर्ति होती है। लेकिन अब बैन वाले राज्यों में सख्ती बरते जाने की वजह से दिक्कतें बढ़ गई हैं। जो गाय की खाल पहले 600-700 रुपए में मिलती थी वो अब 2500 रुपए में मिल रही है।

क्रिकेट बॉल्स बनाने वाले बड़े उद्योगों को ज़्यादा असर नहीं पड़ा क्योंकि वो गाय की खाल को विदेश से मंगाने की क्षमता रखते है। छोटे उद्योग अब भैंस के चमड़े को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन गाय की खाल की तुलना में मोटी होने की वजह से इस पर बॉल की अच्छी क्वालिटी नहीं आ पाती।  

उत्तर प्रदेश में गाय, बैल के वध पर प्रतिबंध है। उल्लंघन करने वालों को 10 हज़ार रुपए जुर्माने के साथ जेल की सज़ा हो सकती है। हरियाणा, जम्मू कश्मीर, झारखंड और राजस्थान में गोवध पर 10 साल जेल की सज़ा का प्रावधान है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, और तमिलनाडु में गोवध पर जेल की अवधि को लेकर अलग अलग सज़ाएं हैं।  

देश में केरल, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम ऐसे राज्य हैं जहां इस मामले में बैन नहीं लागू है।