न्यायपालिका पर विश्वसनीयता का संकट-चीफ जस्टिस ठाकुर

नई दिल्ली (14 मार्च): सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने  कहा है कि इस समय भारत की न्यायपालिका विश्वसनीयता के संकट का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि ये एक बड़ी चुनौती है जो उसे खुद के अंदर से मिली हुई है। उन्होंने न्यायाधीशों से अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत रहने को कहा। काफी संख्या में मामलों के लंबित होने पर चिंता जताए जाने पर न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि न्यायाधीशों के अतिरिक्त घंटे बैठने के तैयार होने पर भी मामलों के निपटारे में बार बहुत सहयोगी नहीं रहा है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के 150वें स्थापना वर्ष के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि कभी-कभी जजों को लगता है कि बार के मदद न करने से भी मामलों के निपटारे में देरी होती है। चीफ जस्टिस ने कहा कि वह वकीलों को आश्वस्त कर सकते हैं कि अगर बार मदद करता है तो जज पुराने मामलों का निपटारा करने के लिए शनिवार को भी बैठने को तैयार हैं। खास तौर उन मामलों में जिन में लोग सालों से जेल में कैद हैं। जस्टिस ठाकुर ने कहा कि जजों ने बेखौफ होकर अपनी जिम्मेदारी निभाई है, लेकिन सिर्फ अतीत की उपलब्धियों पर खुश नहीं रहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि भविष्य में हमारे सामने बड़ी चुनौतियां हैं और हमें उनसे निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के गौरवपूर्ण इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस अदालत ने मुश्किल चुनौतियों का भी सामना किया है, लेकिन न्यायाधीश उस वक्त आगे बढ़े। उन्होंने बेखौफ होकर अपने कर्तव्य भी निभाए, लेकिन हम सिर्फ अतीत की उपलब्धियों पर मुग्ध नहीं रह सकते।