पढ़िये, गाय ने कैसे बचायी एक दिल की मरीज महिला की जान !

नई दिल्ली (24 जून): धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भारत में गाय को पूज्यनीय माना जाता है। पृथ्वी और जन्म देने वाली मां के सामान ही गाय को मां का दर्जा दिया गया है, लेकिन गाय को अब महाराष्ट्र का एक परिवार जीवन दायनी के रूप में पूज रहा है। क्यों कि एक  गाय ने अपना दिल देकर एक महिला की जान बचायी है। यह कोई कहानी नहीं बल्कि वास्तविकता है। मुंबई के नानावती अस्पताल में अमिता पातकी नाम की एक महिला अपने उपचार के लिए आयी। डॉक्टरों ने जब उनका परीक्षण किया तो पता चला कि उनके दिल का एक वाल्व बिल्कुल खराब हो चुका है।

विशेषज्ञों के आपसी राय मशविरा में नतीजा निकला कि अगर अमिता पातकी का दिल का वाल्व नहीं बदला गया तो उनकी जान बचा पाना मुश्किल है। अस्पताल के कार्डियोवस्कुलर सर्जन ने हेमंत पठारे ने अमिता पातकी के खराब वाल्व की जगह गाय के वाल्व को लगाया और अमिता पातकी का दिल में सामान्य रूप से धड़कनें वापस आ गयीं।

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अमिता पातकी को गाय के अलावा किसी अन्य पशु का भी वाल्व लगाया जा सकता था लेकिन गाय का पेरिकार्डियल वाल्व आदमियों के वाल्व जैसा होता है,और इसकी लाइफ भी ज्यादा होती है। इसलिए अमिता पातकी को गाय का वाल्व ही लगाया गया है। अमिता पातकी के दिल में खून का प्रवाह सामान्य है और उनकी धड़कनें भी सामान्य हैं। उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। उन्हें अस्पताल से जल्दी छुट्टी भी दे दी जाय़ेगी।