एंटी रोमियो के नाम से ही चलेगा स्क्वॉड, रोमियो शब्द हटाने से कोर्ट का इनकार


नई दिल्ली(5 अप्रैल): हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने महिलाओं और लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए योगी सरकार की ओर से बनाए गए एंटी रोमियो स्क्वॉड में रोमियो का नाम इस्तेमाल करने पर दखल देने से इनकार कर दिया है।


- जस्टिस एपी साही और जस्टिस संजय हरकौली की बेंच ने नाम बदलने की मांग वाली रितुराज मिश्रा की एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि स्क्वॉड का नामकरण कोई न्यायोचित विषय नहीं है, बल्कि कोर्ट का कार्य यह देखना है कि जो कार्यवाही की जा रही है, वह नागरिकों के सुरक्षा के लिहाज से औचित्यपूर्ण उद्देश्य है अथवा नहीं।


- याचिका में एंटी रोमियो स्क्वॉड के नामकरण पर आपत्ति जताने के साथ-साथ स्क्वॉड के लिए एक मॉनिटरिंग अथॉरिटी बनाने की भी मांग की गई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि इन विषयों पर पूर्व में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई की जा चुकी है। कोर्ट ने एंटी रोमियो स्क्वॉड के नामकरण के मुद्दे पर नसीहत दी कि साहित्य को गहराई से पढ़ना होता है।


- रोमियो और जूलियट नाटक को भले शेक्सपियर ने रोमांटिक नाटक के तौर पर लिखा था, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह नाटक मूल रूप से 1497 में इटली के स्ट्रीट ऑफ वेरोना में लिखी कहानी से लिया गया था। शेक्सपियर के नाटक में रोमियो एक समर्पित और प्रतिबद्ध व्यक्ति के तौर पर दर्शाया गया है, जो शायद उनके किसी भावनात्मक पक्ष के कारण हो, लेकिन जिन्होंने रोमियो और जूलियट नाटक पढ़ा होगा, वे अक्सर इस बात को भूल जाते हैं कि यह नाटक दर्शाता है कि एक नाम क्या होता है।


- कोर्ट ने रोमियो और जूलियट नाटक के 'एक्ट-टू, सीन-टू' का जिक्र भी किया, जिसमें कहा गया है कि 'एक नाम में क्या रखा है? वह जो गुलाब है, उसे यदि कोई अन्य शब्द दे दिया जाए तो भी प्यारी महक ही देगा।'


- कोर्ट ने आगे कहा कि स्क्वॉड का नामकरण यदि एक ईमानदार उद्देश्य के लिए किया गया है तो इसे साहित्य के खिलाफ अपराध से जोड़ना, बिना तथ्यों को जाने बिल्कुल गलत है। कोर्ट ने कहा कि पूर्व की याचिका पर सुनवाई के दौरान भी हम कह चुके हैं कि यह न्यायोचित विषय नहीं है। लिहाजा राज्य सरकार की ओर से स्क्वॉड का नाम चुने जाने सम्बंधी विषय की इस याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।