स्पाइस जेट अदालत में जमा करवाये 579 करोड़ रुपये

नई दिल्ली (31 जुलाई): दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट और सन ग्रुप के प्रमुख कलानिधि मारन और उनकी काल एअरवेज को स्पाइसजेट के शेयरों के हस्तांतरण को लेकर उनके विवाद को पंच निर्णय प्रक्रिया से एक साल के अंदर सुलझाने के लिए पंचों की समिति नियुक्त करने को कहा।

इसके साथ ही अदालत ने स्पाइसजेट को 12 महीने में अदालत में 579 करोड़ रुपए की राशि जमा कराने का निर्देश भी दिया है। मारन और उनकी विमानन कंपनी ने मांग की है कि स्पाइसजेट की खरीद-बिक्री के 2015 के समझौते (एसपीए)के अनुसार उन्हें इस एअरलाइन के शेयर वारंट जारी किए जाएं। इसी एसपीए के आधार पर कम किराए वाली इस विमानन कंपनी के स्वामित्व का हस्तांतरण इसके सह-संस्थापक अजय सिंह को किया गया था।

मारन और उनकी कंपनी की याचिका में आरोप लगाया गया कि स्पाइसजेट को करीब 579 करोड़ रुपए भुगतान करने के बावजूद विमानन कंपनी ने उन्हें शेयर वारंट या परिवर्तनीय भुनाने योग्य तरजीही शेयर की पहली और दूसरी किस्त जारी नहीं की। उनका यह भी कहना है कि उनकी ओर से दी गई राशि से स्पाइसजेट के सांविधिक बकायों का भुगतान भी नहीं किया गया जिसके कारण उनके खिलाफ मुकदमे खड़े हो गए हैं।