कोर्ट ने पुरुष को रेप के आरोप से बरी किया, कहा- ये 'युवावस्था की अधीरता' थी

नई दिल्ली (21 जनवरी) :  दिल्ली की एक अदालत ने एक शख्स को शादी का झूठा झांसा देकर एक महिला के साथ रेप के आरोप से बरी कर दिया है। कोर्ट ने साथ ही इस मामले को 'युवावस्था की अधीरता' में दोनों का सहमति से बनाया गया अंतरंग संबंध बताया।  

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अतिरिक्त सेशंस जज वीरेंद्र भट्ट ने हरियाणा निवासी विकुल बख्शी को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन अभियुक्त पर आरोप साबित करने में नाकाम रहा। कोर्ट ने आरोप लगाने वाली महिला के बयानों को 'विरोधाभासी और असतत'  बताते हुए आरोपी को बरी करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा, 'ऐसा लगता है कि दोनों, जो कि अपनी युवावस्था के चरम पर थे, ने युवावस्था की अधीरता में शारीरिक संबंध बनाए, इसके अलावा और कुछ नहीं।'

कोर्ट ने आगे कहा, 'ऐसा कोई सबूत रिकॉर्ड पर नहीं है जो ये बताता है कि आरोप लगाने वाली महिला ने अभियुक्त के शादी का वादा करने पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की सहमति दी थी। या आरोपी को ये मालूम था कि उसने शादी के वादे पर शारीरिक संबंध बनाने की सहमति दी है।'

जज ने कहा कि पीड़ित का अभियुक्त के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए सहमति देना स्वैच्छिक था और किसी वादे जैसी बात से अप्रभावित था।

अभियोजन के मुताबिक महिला ने विकुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (रेप) और 506 (आपराधिक उकसावे) के तहत केस दर्ज किया था। महिला ने कहा था कि उसकी इच्छा के विपरीत अभियुक्त ने शादी का झूठा झांसा देकर दो बार शारीरिक संबंध बनाए थे। साथ ही धमकी दी थी कि अगर शादी के लिए ज़ोर डाला तो वो उसे बदनाम कर देगा।

कोर्ट ने सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर दोनों के बीच संवादों के आदान-प्रदान के आधार पर कहा कि इनसे साफ होता है कि आरोप लगाने वाली महिला खुद ही शारीरिक संबंध बनाने को अधीर थी और वो ऐसा किसी शादी के वादे के आधार पर नहीं कर रही थी।