शहाबुद्दीन की जमानत पर फैसला शुक्रवार को

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली (29 सितंबर): बिहार सरकार के वकील और तेज़ाब कांड के पीड़ित चंदा बाबू के वकीलों की दलील के बाद आज शहाबुद्दीन के वकील की बारी थी। उसके वकील शेखर नाफड़े ने कई तकनीकि पहलुओं के सहारे जमानत रद्द न करने की जोरदार पैरवी की। उसने दलील दी कि चंदा बाबू के जिस तीसरे लड़के की हत्या का आरोप उनके मुवक्किल पर है,जब कि वो  समय जेल में था।

चंदा बाबू के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि शहाबुद्दीन जेल में था जरूर लेकिन अपनी मर्जी से जब चाहता था बाहर आ जाता था और फिर अंदर पहुंच जाता था। यह बात सीवान के मजिस्ट्रेट ने भी अपनी रिपोर्ट में दर्ज की है। शहाबुद्दीन के वकील ने दलील दी की उनके मुवक्किल को चार्जशीट की कॉपी तक नहीं दी गयी।

कोर्ट ने चार्जशीट वाले आरोप पर जब बिहार सरकार के वकील से पूछा तो बिहार सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। जिसपर कोर्ट ने टिपण्णी की कि ये तो गंभीर बात है कि 17 महीने तक अभियुक्त को चार्जशीट की कॉपी नहीं दी गयी। प्रशांत भूषण ने इस आरोप का जवाब देते हुए कहा कि शहाबुद्दीन ने कभी भी चार्जशीट की मांग नहीं की। ऐसे में ये आरोप बेबुनियाद है।

आखिर में शहाबुद्दीन के वकील ने कोर्ट से ये गुहार लगायी कि कोर्ट जो चाहें शर्ते लगा दे, कोर्ट कहे तो वो बिहार छोड़ने को भी तैयार है लेकिन जमानत रद्द न की जाय। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है ।