राम के खिलाफ केस में कोर्ट ने पूछा- किस तारीख को भगवान राम ने सीता को त्यागा था...

सीतामढ़ी (2 फरवरी): बिहार के सीतामढ़ी में डुमरी कला गांव निवासी अधिवक्ता ठाकुर चंदन सिंह ने शनिवार को सीजेएम अदालत में भगवान राम और लक्षमण के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। इसमें सीजेएम रामिबहारी ने यह कहते हुए सोमवार को खारिज कर दिया कि यह मामला पूरी तरह तथ्यहीन व निराधार है। मामले की सुनवाई के दौरान कई रोचक सवाल समाने आए...

कोर्ट ने पूछा... जब चंदन ने कहा कि भगवान राम ने मां सीता के साथ अच्छा नहीं किया था। इसका जवाब देने के बाद कोर्ट ने पूछा कि पहले आप घटना की तिथि व समय बताएं। इस सवाल के जवाब में चंदन कुछ भी नहीं बोल पाए वहीं मौजूद लोगों ने उनका मजाक बनाया।

आदित्यनाथ ने जाहिर की नाराजगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और गोरखपुर से सांसद महंत आदित्यनाथ ने बिहार के सीतामढ़ी में भगवान राम और लक्ष्मण के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि ऐसे लोग सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए इस तरह के काम करते हैं।

क्यों दर्ज हुआ था मुकदमा चंदन ने आरोप लगाया था कि त्रेता युग में भगवान राम ने एक धोबी की बातों में आकर अपनी पत्नी सीता (मां जानकी) का परित्याग कर दिया था। याचिका में कहा गया कि कोई पुरुष अपनी पत्नी के खिलाफ इतना निष्ठुर कैसे हो सकता है, वह भी तब जब वह सभी सुखों का त्याग कर उनके साथ 14 साल तक वनवास पर रही हो।

क्या था उद्देश्य चंदन सिंह के अनुसार, मुकदमा दर्ज कराने का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, मां सीता को न्याय दिलाना है। परिवाद पत्र में चंदन ने लिखा है, "सीता जी मिथिला की बेटी थीं और सौभाग्य से वह भी मिथिला की धरती पर पैदा हुए हैं। उन्हें लगता है कि भगवान राम ने मिथिला की बेटी के साथ न्याय नहीं किया, इसलिए वह उन्हें न्याय दिलाना चाहते हैं।"