तब और अब : 18 साल पहले मौत के मुंह से निकाला, अब ग्रेजुएशन के गवाह बने

नई दिल्ली (28 मई) : जोसी एपोंटे ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में अपना डिप्लोमा हासिल किया तो दर्शकों में तालियां बजाने वालों में एक खास मेहमान मौजूद थे। ये खास मेहमान थे वो पुलिस अफसर जिन्होंने जोसी को मौत के मुंह से सुरक्षित निकाला था।

बीते हफ्ते ईस्टर्न कनेक्टिकट स्टेट यूनिवर्सिटी में जोसी ने डिप्लोमा हासिल किया तो पीटर गेट्ज भी पूरे जोश के साथ तालियां बजा रहे थे। जोसी ने कहा, जब मैं 5 साल की थी तो मौत के मुंह में करीब करीब जा चुकी थी। लेकिन ये पीटर और अथॉरिटी के दूसरे अधिकारी ही थे जिनकी वजह से आज मैं जीवित हूं।

इस कहानी को समझने के लिए हमें 18 साल पीछे 1998 में जाना होगा। 25 जून 1998 को हार्टफोर्ड, कनेक्टीकट के एक अपार्टमेंट में बुरी तरह आग लगी थी। पुलिस अफसर पीटर गेट्ज मौके पर पहुंचे तो एक फायरफाइटर ने बुरी तरह झुलसी 5 साल की बच्ची जोसी को उनके हवाले किया। जोसी उस वक्त पूरी तरह अचेत थी और उसमें कोई हरकत नहीं हो रही थी। पीटर के पास उस वक्त एम्बुलेंस का इंतज़ार करने का वक्त नहीं था। पीटर ने फौरन जोसी को अपनी पेट्रोल कार की बैक सीट पर लिटाया। जोसी को चेतना में लाने के लिए पीटर लगातार उसे सीपीआर (सांस को कायम रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया) देते रहे। पीटर के एक साथी ने कार को तेज़ गति से ड्राइव करते हुए हॉस्पिटल तक पहुंचाया। इमरजेंसी रूम तक पहुंचते जोसी खुद ही सांस लेने लगी थी।   

जोसी के मुताबिक अगर उस दिन एंबुलेंस के इंतज़ार में कुछ सेंकेड और लग जाते तो उसकी निश्चित तौर पर जान चली जाती। इस हादसे में जोसी के एक अंकल की मौत हो गई। अस्पताल में जब तक जोसी रही, पीटर लगातार उसका हाल जानने के लिए आते रहे। उन्होंने उसे टेडी बीयर भी दिया।  

पीटर ने उस दिन की घटना को याद करते हुए कहा, 'ये उन बातों में से एक है जो आपके दिल को छूती है और सदा आपके साथ रहती है। उस दिन फॉयरफाइटर्स ने अपना काम किया। मैंने अपनी ड्यूटी की। हॉस्पिटल स्टॉफ ने भी कर्तव्य निभाया। इस सब का परिणाम है कि एक खूबसूरत लड़की धरती पर अपनी यशगाथा लिखने के लिए मौजूद है।  

जोसी के ठीक होने के बाद भी कुछ वर्षों तक पीटर उसके स्कूल में उसका कुशलक्षेम लेते रहे। लेकिन जोसी के परिवार के दूसरे शहर में मूव करने की वजह से उनका संपर्क टूट गया।

हाल में दो साल पहले आग के हादसे वाली फोटो को ऑनलाइन देखने के बाद जोसी ने फिर पीटर से संपर्क साधा। तब से उनकी बातचीत होती रही है। अब जोसी का डिप्लोमा का वक्त आया तो उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के साथ पीटर को भी आमंत्रित किया।