कुकिंग ऑयल से हो रहा कैंसर, हार्ट अटैक !

नई दिल्ली (3 फरवरी): अमेरिका और यूरोप समेत विश्व के अधिकांश देशों ने कई साल पहले जिस खतरनाक ट्रांस फैट पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी,उस फैट का हमारे यहां अभी भी वनस्पति और रिफांइड तेलों में भरपूर प्रयोग हो रहा है। इस वजह से देश में ह्रदय, मधुमेह, अल्जाइमर, कैंसर आदि घातक बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ट्रांस फैट को हमारे शरीर को दिनभर में मिलने वाली ऊर्जा का एक प्रतिशत हिस्सा से कम रखने की अनुशंसा की है।

सीएसई ने किया था खुलासा

गैर सरकारी संस्था सेंटर फॉर साइंस एडं इनवायरमेंट (सीएसइ) ने वर्ष 2012 में 30 ब्रांडेड तेलों पर अनुसंधान करके बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया था। सीएसइ ने इन तेलों का अपनी प्रयोगशाला में परीक्षण करके कहा था, 'हमें रसोई के तेल से धीमा जहर मिल रहा है और हम हर रोज खतरनाक बीमारियों की गिरफ्त में जा रहे हैं।”इस संस्था ने इन तेलों में डेनमार्क के अंतरराष्ट्रीय मानक दो प्रतिशत से कहीं अधिक पांच से 23 प्रतिशत तक ट्रांस फैट की मौजूदगी की पुष्टि की थी। सीएसइ की इस पहल के बाद भारतीय खाद्य एवं सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफसएएसएआई)ने तेल कंपनियों के लिए भार से 10 प्रतिशत से कम ट्रांस फैट का मानक तय किया और इस वर्ष फरवरी तक इसे पांच प्रतिशत लाने के लिए अधिसूचना जारी की गयी है।