आजम खान और गवर्नर राम नाइक के बीच बढ़ी तकरार

लखनऊ (26 मार्च): यूपी के कद्दावर मंत्री आजम खान और गवर्नर राम नाइक के बीच तकरार बढ़ती ही जा रही है। आजम खान ने राम नाइक के आरोपों का जवाब दिया है। आपको बता दें कि आजम खान ने राम नाइक पर विधानसभा में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद राम नाइक ने आजम खान को नाकाबिल बताया था। 

ये बयान उस लंबे-चौड़े बयान का एक हिस्सा भर हैं, जो यूपी के कद्दावर मंत्री आजम खान ने गवर्नर राम नाईक के आरोपों पर दिया है। इस बयान के शब्दों में छिपी तल्खी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यूपी की राजनीति किस दौर से गुजर रही है।

हर राजभवन और सरकार के बीच तनातनी की खबरें हमेशा से आती रही हैं। लेकिन जब बात यूपी की हो,तो मामला कुछ अलग हो जाता है। राज्यपाल राम नाईक और मंत्री आजम खान इसके पहले भी कई बार आमने सामने हो चुके हैं और इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है।

इसकी शुरूआत तब हुई थी, जब आजम खान ने यूपी विधानसभा में राज्यपाल के बारे में कुछ ऐसी टिप्पणी की थी,जो आपत्तिजनक थी,आजम खान ने वि‍धानसभा में यूपी नगर नि‍गम संशोधि‍त वि‍धेयक 2015 को राजभवन में रोके जाने का मुद्दा उठाया था।  

राज्यपाल पर आजम खान के आरोप नगर नि‍गम संशोधि‍त वि‍धेयक 2015 राजभवन में मंजूरी के लिए फंसा पड़ा है। बीजेपी के बेईमान मेयरों को बचाने के लि‍ए वि‍धेयक पर साइन नहीं कि‍ए जा रहे हैं। बात यहीं खत्म नहीं हुई आजम खान ने किसी भी विधेयक को राजभवन में रोके जाने की समयसीमा पर भी सवाल खड़े किए थे। बहरहाल विधानसभा में स्पीकर ने गवर्नर का बचाव किया था और मंत्री आजम खान की 60 लाइन्स की टिप्पणी में से 20 लाइन्स को कार्यवाही से हटा दिया था।

इसके बाद गवर्नर राम नाइक ने अब खुद मोर्चा संभाल लिया है। गवर्नर ने विधानसभा में हुई कार्यवाही की सीडी और दूसरे दस्तावेज देखने के बाद मंत्री आजम खान पर वार किया था।

आजम खान पर राज्यपाल के बोल  कार्यवाही से संसदीय कार्यमंत्री की 33 फीसदी पंक्ति हटाना दर्शाता है कि उनकी भाषा विधानसभा की गरिमा, मर्यादा और परंपरा के अनुकूल नहीं है। सदन में संसदीय कार्यमंत्री का बयान उनके संसदीय कार्य मंत्री की योग्यता पर प्रश्नचिन्ह के समान है कि क्या वे इस कार्य के योग्य हैं ? 

गवर्नर के इस खत में पूरी तरह से आजम खान को निशाना बनाया गया। आजम खान की काबिलियत पर सवाल उठाए गए, तो वहीं आजम खान ने गवर्नर के हमले का जवाब कुछ इस अंदाज में दिया।

बहरहाल सियासी रस्साकशीं जारी है, दोनों तरफ से एक दूसरे पर हमला करने का कोई मौका छोड़ा नहीं जा रहा है। इन सबके बीच ये सवाल अपनी जगह पर कायम है कि क्या जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग कब जिम्मेदार बनेंगे, कब उनकी जुबान उनके काबू में आएगी, कब वो पद की गरिमा और मर्यादा का लिहाज करेंगे।

देखिए वीडियो

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