GST से ग्राहकों को परेशानी नहीं तो, व्यापारी क्यों हैं परेशान?: अरुण जेटली

नई दिल्ली(2 जुलाई): देशभर में 1 जुलाई से जीएसटी लागू हो गया है। जीएसटी को लेकर कुछ कारोबारी नाराज है। इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हैरानी जाहिर करते हुए शनिवार को कहा कि जीएसटी को लेकर उपभोक्ता कोई शिकायत नहीं कर रहे तो फिर व्यापारी इतने परेशान क्यों हैं। जबकि टैक्स का बोझ तो अंतत: उपभोक्ताओं पर ही पड़ना है। वित्त मंत्री ने कहा, अप्रत्यक्ष कर का भार खरीददारों को झेलना होता है, फिर भी पता नहीं क्यों कुछ व्यापारी शिकायत कर रहे हैं?


उन्होंने कहा, 'देश में कोई भी ग्राहक शिकायत नहीं कर रहा, क्योंकि हमने उचित टैक्स बास्केट बनाने की कोशिश की है। फिर एक या दो व्यापारी क्यों शिकायत कर रहे हैं? व्यापारियों को टैक्स नहीं देना है, ग्राहकों को देना है।' जेटली ने कहा कि समाज इस मानसिकता से बंधा हुआ है कि टैक्स न देना कोई बुरी बात नहीं है। उन्होंने कहा, 'इस मानसिकता को बदले जाने की जरूरत है। अगर भारत को विकासशील अर्थव्यवस्था से विकसित अर्थव्यवस्था बनना है तो लोगों को यह व्यवहार और मानसिकता बदलनी होगी। यह समय की बात है कि यह मानसिकता विकसित देशों की भी मानसिकता बन गई है।'


जेटली ने कहा कि सरकार को रक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्चे के लिए धन की जरूरत है और कुछ कड़े फैसले अर्थव्यवस्था की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए किए गए हैं। वित्त मंत्री ने कहा, 'आर्थिक सुधार के लिए यह जरूरी है कि सरकार की दिशा सही हो। अधपकी योजना से सुधार नहीं हो सकता। जो सरकार झिझकती है वह सुधार नहीं ला सकती।' उन्होंने साथ ही कहा कि जीएसटी से तैयार किए गए मजबूत आधार से टैक्स का भार कम करने में मदद मिलेगी।


उन्होंने कहा कि 15 प्रतिशत के सिंगल टैक्स से गरीबों पर भार पड़ता और सरकार की कर नीति में साम्यता नहीं रह जाती। केंद्रीय वित्त मंत्री एवं राज्यों के वित्त मंत्रियों की सदस्यता वाले जीएसटी काउंसिल ने 5,12,18 और 28 प्रतिशत का चार टैक्स स्लैब तैयार किया है। वित्त मंत्री ने कहा, 'चिंता की कोई बात नहीं है। कुछ लोग चिंतित है और वे इससे दूरी बना रहे हैं। यह देश का सामूहिक फैसला है और मुझे भरोसा है कि इससे देश को लाभ मिलेगा। जब कभी बदलाव होता है, तो टेक्नॉलजी आधारित दिक्कतें होती ही हैं।'