Blog single photo

ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ता खर्च में आई बड़ी गिरावट

देश में प्रति व्यक्ति औसत मासिक खर्च में 3.7 फीसदी की गिरावट आई है। 2011-12 के 1,501 रुपये के मुकाबले ये घटकर 2017-18 में 1446 रुपये पर जा पहुंचा है। इस आंकड़े को वित्त वर्ष 2009-10 को बेस ईयर मानते हुए महंगाई के हिसाब से तैयार किया जाता है।

(Image Source Google)

मनीष कुमार, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (16 नवंबर): देश में प्रति व्यक्ति औसत मासिक खर्च में 3.7 फीसदी की गिरावट आई है। 2011-12 के 1,501 रुपये के मुकाबले ये घटकर 2017-18 में 1446 रुपये पर जा पहुंचा है। इस आंकड़े को वित्त वर्ष 2009-10 को बेस ईयर मानते हुए महंगाई के हिसाब से तैयार किया जाता है। एनएसओ के रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय साल 2017-18 में ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ता खर्च में 8.8  फीसदी की गिरावट आई है।

पिछले छह साल की बात करें तो शहरों में उपभोक्ता व्यय में महज 2 फीसदी की बढ़त हुई है। इससे एक बात तो साफ है अर्थव्यवस्था में मांग लगातार घटती जा रही है जो हाल ही में एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेब्लस और ऑटो सेक्टर के सेल्स के घटते आंकड़ों से भी पता लगता है। एनएसओ द्वारा ये सर्वे जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच किया गया था। एनएसओ की रिपोर्ट को जून, 2019 में जारी करना था लेकिन खराब आकड़ों की वजह से सरकार ने इसे जारी नहीं किया। 

बहरहाल ग्रामीण इलाकों में मांग के घटने के बाद इसे मुद्दे को लेकर राजनीति भी शुरु हो गई है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर द्ववीट कर निशाना भी साधा है। प्रियंका गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा कि भारत में उपभोक्ता खपत धराशायी हो चुकी है। पूर्व की सरकारों ने गरीबी हटाने और लोगों को सशक्त बनाने का काम किया, लेकिन ये सरकार लोगों में गरीबी की ओर ढकलने का इतिहास रच रही है।

ग्रामीण इलाकों के लोगों को सरकार की नितियों का खामियाजा उठाना पड़ रहा है। लेकिन बीजेपी यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि उसके कॉरपोरेट मित्र अमीर होते रहें। मतलब साफ है कि इस मुद्दे में जमकर राजनीति होने वाली है और विपक्ष इसे लेकर आने वाले संसद के सत्र में मोदी सरकार पर निशाना साधने वाला है।  

Tags :

NEXT STORY
Top