2015 से सऊदी अरब में चल रही थी तख्ता पलट की साजिश!

नई दिल्ली (20 जुलाई): शाही चकाचौंध के बीच सऊदी अरब में सत्ता के गलियारों में कुछ ऐसा हो रहा है जिसक नतीजे गंभीर भी हो सकते हैं। मोहम्मद बिन नायिफ को जब से क्राउन प्रिंस के तख्त से बेदखल किया गया है तभी से सऊदी शाह के खिलाफ बगावत के सुर तेज होने लगे हैं। इसी लिए सऊदी शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज जल्द से जल्द अपने छोटे बेटे मोहम्मद बिन सलमान को सल्तनत सौंप देना चाहते हैं। सऊदी अरब के शाही महलों से आवाज उठने लगी है कि नायिफ के खिलाफ साजिश तो 2015 में शुरु हो चुकी थी।

अचानक उनकी अदालत को भंग कर दिया गया और उनकी शक्तियां सऊदी शाह में नीहित कर दी गयीं। वो तभी से केवल नाम के क्राउन प्रिंस रह गये थे। नायिफ की बेदखली को जायज ठहराने के लिए शाही महलों से शिगूफे निकल रहे हैं कि नायिफ ड्रग्स के आदी हो चुके थे। वो खुद फैसले नहीं ले पाते थे। यहां तक कि वो सार्वजनिक सभाओं में बोलते समय हकलाने और बहकने लगे थे। सऊदी शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज ने उन्हें इसके लिए कई बार टोका और अपना इलाज करवाने को कहा लेकिन नायिफ ड्रग्स के नशे को नहीं छोड़ पाये। जबकि नायिफ के तरफदारों का कहना है कि 2009 में एक आत्मघाती हमले में घायल हुए नायिफ का इलाज स्विटजरलैण्ड में चल रहा है। उनके शरीर में कुछ स्पिलिंटर्स रह गये हैं। जिनका ऑप्रेशन भी संभव नहीं है। उनके दर्द से निजात पाने के लिए नायिफ ड्रग्स लेते हैं।

नायिफ के तरफदारों का कहना है कि तख्तापलट के बाद नायिफ को नजरबंद कर दिया गया है। उनके वफादार सुरक्षा गार्डों को हटाकर नये सुरक्षागार्ड तैनात कर दिये गये हैं। उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिये गये हैं। किसी भी शख्स से वो बिना इजाजत बात भी नहीं कर सकते। उन्हें सिर्फ अपनी बूढ़ी मां से मिलने की इजाजत है, वो भी नये सुरक्षा गार्डों के घेरे में रह कर। ऐसा भी कहा जा रहा है कि नव नियुक्त क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दामाद कुशनेर के आपसी संबंध काफी मजबूत हैं। इसलिए अमेरिका भी सऊदी अरब में हो रहे बदलावों को समर्थन दे रहा है।