कॉंजगल राइट्स, शारीरिक संबंध का अधिकार नहीं देता- हाईकोर्ट

नई दिल्ली (8अक्टूबर):  दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि कॉन्जगल राइट्स (दांपत्य अधिकार) बहाल किए जाने के लिए पति-पत्नी के बीच के बीच सेक्स जरूरी नहीं है। 'कॉन्जगल राइट्स' का मुद्दा आम तौर पर तब उठता है जब दंपती तलाक की अर्जी डालते हैं या दोनों के बीच कोई अनबन होती है। ऐसे में अदालतें दोनों के बीच दांपत्य अधिकार बहाल करने का आदेश दे सकती हैं।

एक महिला ने दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी डालकर कहा था कि वह अपने पति के साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहती है। एक निचली अदालत ने याचिकाकर्ता महिला और उसके पति के बीच कॉन्जगल राइट्स बहाल किए जाने के आदेश दिए थे। महिला की अर्जी पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया,'दांपत्य अधिकार को बहाल रखने के आदेश का मतलब यह नहीं है कि पति-पत्नी सेक्स करने के लिए बाध्य हैं। इसका मतलब है कि दोनों साथ-साथ रहें अगर दंपती एक साल तक कॉन्जगल राइट्स को बहाल नहीं रख पाते यानी एक साल तक साथ नहीं रह सकते तो मामला तलाक की ओर जा सकता है।'

कोर्ट ने कहा दांपत्य अधिकार को बहाल करने के आदेश का उद्देश्य यह होता है कि दोनों पार्टी साथ रहें, सहजीवन में रहें। अगर इस आदेश का पालन नहीं होता तो इस आधार पर तलाक की अर्जी दाखिल की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के दिमाग में कॉन्जगल राइट्स को लेकर गलतफहमी है क्योंकि इसमें सेक्शुअल रिलेशन बनाने की बाध्यता नहीं होती। भूली-बिसरी चीजों के लिए घर में प्रवेश न करें। क्योंकि, ऐसा करने से इस टोटके का प्रभाव लगभग खत्म हो जाता है।