कांग्रेस और बसपा के बीच पक रही है कुछ खिचड़ी!

मानस श्रीवास्तव/संजीव त्रिवेदी, नई दिल्ली (6 जून): क्या उत्तर प्रदेश के चुनाव के लिए कांग्रेस और बीएसपी के बीच कुछ खिचड़ी पक रही है? ये सवाल इसलिए उठा है क्योंकि देश के तीन राज्यों से कांग्रेस के उम्मीदवारों की जब राज्यसभा सीट अटक रही है, तब वहां कांग्रेस मायावती के आसरे बैठी है। ऐसे में कयास ये लगने लगे हैं कि क्या ये मदद यूपी चुनाव से पहले किसी बड़े सियासी समझौते की तैयारी है या फिर बीएसपी की सियासी मजबूरी?

राजनीति में एक नियम है, कहते हैं कि पास का नुकसान नहीं, दूर का फायदा देखिए। शायद बीएसपी की मुखिया मायावती उसी फॉर्मूले पर चल रही हैं। राज्यसभा चुनाव में जब हर जगह कांग्रेस के उम्मीदवारों को बीजेपी ने निर्दलीय कैडिंडेट वाले जाल में फंसाया तो कांग्रेस हाथी की सवारी करती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार विवेक तनखा को राज्यसभा जाने के लिए 58 वोट चाहिए। कांग्रेस के पास 57 वोट ही हैं। बीजेपी ने विनय गोटिया की उम्मीदवारी से पेंच फंसा रखा है। तब बहिनजी कांग्रेस के खेवनहार बनी हैं, जिन्होंने अपने चार विधायकों को कांग्रेस कैंडिडेट विवेक तनखा का समर्थन करने को कहा है।

जो मध्य प्रदेश में मायावती ने माया कांग्रेस पर बरसाई है। वैसी ही कृपा यूपी, उत्तरखांड में भी बरसा रही हैं। यूपी में कपिल सिब्बल की दावेदारी फंसी हुई है। कांग्रेस को अपने 29 वोट के अलावा पांच वोट और चाहिए। संभावना है कि सिब्बल को ये संजीवनी भी मायावती के जरिए ही मिलेगी। उत्तराखंड में कांग्रेस से उतरे प्रदीप टमटा की सीट पर भी संकट है। टमटा को जीत के लिए 29 वोट चाहिए, कांग्रेस के पास 27 ही वोट हैं। उत्तराखंड में भी कांग्रेस की सीट बीएसपी का हाथी ही पार लगा रहा है।

इसीलिए पूछा जाने लगा कि आखिर मायवाती का साथ, कांग्रेस का हाथ ये जुगलबंदी क्या कहती है? लोकसभा चुनाव में यूपी से डिब्बा गुल होने का दर्द झेल चुकीं मायावती की कांग्रेस पर इतनी मेहरबानी की कुछ वजहें बताई जा रही हैं। जानकारों के मुताबिक कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर मायावती मुस्लिम वोट वापस खींचना चाहती हैं। साथ ही ब्राह्मण वोटबैंक को भी छिटकने नहीं देना चाहतीं। इसीलिए कहा जा रहा है कि मायावती इस वक्त जो भी दांव कांग्रेस के लिए चल रही हैं, उसका निशाना यूपी के चुनाव हैं।