कॉन्डोम्स, पैड्स के साथ अब 'पाउच' भी ...

नई दिल्ली (6 अप्रैल): कॉन्डोम्स, डायपर, सैनिटरी पैड, नैपकिन और कॉटन पैड्स जैसे प्रॉडक्ट बनाने वाली कंपनियों को अब अपने उत्पाद के साथ ऐसे पाउच या रैपर भी देने होंगे जिनमें उन्हें इस्तेमाल के बाद ठीक तरह से निस्तारित किया जा सकेगा। पर्यावरण मंत्रालय ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की सरकारी नीति के तहत इस प्रावधान को अनिवार्य कर दिया। डायपर्स, कॉन्डमस्, और सैनिटरी पैड्स अगर रैपर में ठीक से पैक न हों तो कचरा बीनने वाले उन्हें चुनने से हिचकते हैं और इसी के मद्देनजर सरकार ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

इतना ही नहीं, नए नियमों के तहत कंपनियों, ब्रैंड के मालिकों और मार्केटिंग कंपनियों से इन प्रॉडक्ट्स के निपटारे के तौर तरीकों के बारे में आम लोगों को शिक्षित करने की उम्मीद भी की गई है। कंपनी की जिम्मेदारी के कॉन्सेप्ट के तहत 'सैनिटरी वेस्ट' के निपटारे के लिए पाउच या रैपर मुहैया कराने के आर्थिक पहलू और इसकी प्रक्रिया के बारे में विचार किया जाएगा। नये नियमों पूरे देश में लागू करने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की होगी। स्थानीय निकायों को इस तरह का कचरा फैलाने वालों से 'यूजर फी' चार्ज वसूलने और इसे इधर-उधर फैलाने पर जुर्माना लगाने का अधिकार भी दिया गया है।