ईरान के दौरे के बाद मॉस्को रवाना हुईं विदेशमंत्री, जानिए खास बातें

नई दिल्ली (17 अप्रैल): विदेश मंत्री सुषमा स्वराज रविवार को ईरान की दो दिवसीय यात्रा के बाद मॉस्को रवाना हों गईं। जहां वह आरआईसी (रूस, भारत और चीन) के विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेंगी। रविवार को तेहरान में उन्होंने भारतीय समुदाय को भरोसा दिया कि उनकी समस्याओं एवं शिकायतों को ईरानी अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुषमा स्वराज ने तेल समृद्ध फारस की खाड़ी वाले देश ईरान में भारतीयों के योगदान की प्रशंसा की। सुषमा सबसे पहले तेहरान के एक गुरूद्वारे गईं और वहां मत्था टेका। इस गुरूद्वारे की स्थापना 1941 में हुई थी। उन्होंने गुरूद्वारे में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार ईरान में भारतीय समुदाय द्वारा सामना की जाने वाली सभी मुश्किलों को उठाएगी। 

तेहरान दौरे पर उन्होंने कहा, "मैं ईरान की अपनी यात्रा की शुरूआत भारतीय समुदाय से मुलाकात से मिली एक नयी ऊर्जा के साथ कर रही हूं।" सुषमा एक केंद्रीय विद्यालय भी गईं जहां वह छात्रों से मिलीं। उन्होंने कहा, "ईरान के साथ हमारे सदियों पुराने सभ्यतामूलक संबंध भारतीय स्कूल की सांस्कृतिक गतिविधियों से और मजबूत हुए हैं।" इस केंद्रीय विद्यालय की स्थापना 1955 में भारतीय समुदाय ने की थी। भारतीय दूतावास ने 2004 में उसका प्रशासन अपने हाथों में ले लिया था। विद्यालय में वर्तमान में 16 अलग अलग समुदायों के छात्र हैं जिसमें कई अन्य देशों के छात्र भी शामिल हैं। सुषमा ने छात्रों से बातचीत के दौरान उनका आह्वान किया कि वे अपना ध्यान अपनी भूमिकाओं पर केंद्रित करें और मेहनत से पढ़ाई करें।

सुषमा की यात्रा को भारत की तरफ से एक संतुलन बनाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि करीब दो सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सउदी अरब की यात्रा की थी। सउदी अरब एक अन्य पश्चिम एशियाई शक्ति है जो ईरान को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ईरान एक महत्वपूर्ण देश है। इसके साथ ही समृद्ध मध्य एशियाई देशों तक पहुंच बनाने के लिए भी ईरान महत्वपूर्ण देश है। भारत ईरान से करीब 1.2 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात करता है। इसके अलावा वह उससे तेल आयात बढ़ाना चाहता है।