सामुदायिक बंकरों में रहने को मजबूर सीमावर्ती ग्रामीण

नई दिल्ली (25 अक्टूबर): भूमिगत सामुदायिक बंकर ही जम्मू और कश्मीर के आर एस पुरा सेक्टर में सीमा के निकट रह रहे लोगों का दूसरा घर बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा बार-बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किये जाने के कारण अपनी जान बचाने के लिए वे इन बंकरों का सहारा ले रहे हैं।

अपनी जीवन भर की जमापूंजी जोड़कर 60 वर्षीय नागर सिंह ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से कुछ दूरी पर अब्दुलियां गांव में एक घर बनाया लेकिन अपने घर से ज्यादा समय उन्होंने और उनके परिवार ने बंकर में बिताया। सिंह ने बताया, 'जीवन भर की पैसै जोड़कर मैंने हाल ही में एक घर बनाया लेकिन संघर्ष विराम के बार-बार उल्लंघन के कारण मेरे परिवार और मैंने अपने घर से ज्यादा समय बंकरों में ही बिताया है।'

नागर सिंह के घर पर गोलियों के निशान और मोर्टार बम से हुए हमले के कारण बने बड़े छेद इस बात के गवाह हैं कि पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम के उल्लंघन की स्थिति में सीमा के निकट रहने वाले लोगों को किस तरह की समस्याओं का सामना करना पडता है।उन्होंने कहा, 'हमारे घरों पर बम और गोली बरसते हैं। हमारे घरों पर पाकिस्तान की ओर से मोर्टार बम दागे जाने के कारण कुछ घरों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है।' वर्तमान में संघर्षविराम के उल्लंघन की मार झेल रहे कोरोताना खुर्द गांव के शमशेर सिंह चिब ने बताया, 'हम लोग इन बंकरों के कारण जीवित हैं।'

सरकार ने जम्मू जिले में 43 से अधिक सामुदायिक बंकर बनाये हैं जबकि और 47 बंकरों का निर्माण चल रहा है। जम्मू के उपायुक्त सिमरनदीप सिंह ने बताया, 'आर एस पुरा सेक्टर में हम लोगों के पास 30 सामुदायिक बंकर हैं और केवल जम्मू में इस तरह के 43 बंकर तैयार हैं और 47 का निर्माण कार्य चल रहा है।'