यूपी के बिजनौर में मर्डर के बाद बिगड़ा सांप्रदायिक सौहार्द

कमरुद्दीन फारूकी/प्रशांत गुप्ता, बिजनौर (13 फरवरी): 15 फरवरी को यूपी में दूसरे दौर की वोटिंग हैं, लेकिन मतदान से पहले बिजनौर में आपसी रंजिश में एक 17 साल के लड़के की हत्या का मुद्दा सियासी बनता जा रहा है। इस कत्ल के बहाने इलाके में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। जबकि इस घटना को करीब छह महीने पहले दो गुटों में हुई खूनी रंजिश से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

यूपी में पहले चरण की वोटिंग हो चुकी है और दूसरे दौर का मतदान 15 तारीख को है, लेकिन वोटिंग से पहले बिजनौर में जबरदस्त तनाव है। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। पुलिस लोगों को समझा रही है, लेकिन कोई फायदा नहीं, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हैं।

दरअसल तीन दिन पहले 17 साल के विशाल की हत्या कर दी गई थी। आरोप लग रहे है कि पीएम मोदी की बिजनौर में हुई रैली से लौट रहे संजय और विशाल की कुछ लोगों से एक चुनावी बहस हो गई। इसके बाद विशाल पर जानलेवा हमला कर दिया गया। वारदात में विशाल की मौत हो गई। जाट बाहुल्य इलाके में जैसे ही विशाल की हत्या की खबर फैली, नाराज लोगों ने सड़क जाम कर दी।

हमले में घायल संजय चौधरी नए गांव के प्रधान रह चुके हैं। ऐसे में चुनावी माहौल की वजह से घटना स्थल पर कई नेता भी पहुंच रहे हैं। बीएसपी सुप्रीम मायावती भी एक चुनावी रैली में बिजनौर पहुंची और उन्होंने भी इस जनसभा में विशाल की मौत का जिक्र किया तो आजम खान ने हत्य़ाकांड की सीबीआई जांच की मांग कर दी।

आपसी रंजिश में हुई इस हत्या पर सियासत हो रही है। राजनीतिक दल इस हत्याकांड का अपने-अपने तरीकों से फायदा उठाने की कोशिश में हैं। नेताओं की मंशा भले ही जो हो, लेकिन स्थानीय लोग अच्छी तरह समझते हैं। ये लोग इनके झांसे में नहीं आने वाले हैं और इन लोगों पहले ही तय कर लिया है कि वोट किसे देना है और क्यों देना है।

आपसी रंजिश में हुए इस हत्याकांड को जानबूझकर राजनीतिक रूप दिया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यूपी में मर्डर की बुनियाद पर सांप्रदायिक सियासत की साजिश रची जा रही है ?