'मेरा-तेरा से काम नहीं चलेगा, आतंक से सब को मिल कर लड़ना होगा'

नई दिल्ली (1 अप्रैल):  न्‍यूक्लियर समिट के लिए अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब तक मेरा आतंकवाद और तेरा आतंकवाद करते रहेंगे तब तक इससे नहीं निपटा जा सकता। आतंकवाद के खात्मे के लिए सभी देशों को मिलकर लड़ना होगा।  मोदी ने कहा कि आतंकवाद का खतरा वैश्विक स्‍तर पर है, लेकिन इससे लड़ने के लिए दुनिया के तमाम देशों के बीच वास्‍तविक आपसी सहयोग नहीं है।

वक्‍त के साथ आतंकवाद विकसित हो चुका है और आतंकवादी 21वीं सदी की तकनीक का इस्‍तेमाल कर हैं, लेकिन हमारी प्रतिक्रिया अभी भी पुरानी है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के डिनर के दौरान मोदी ने कहा, 'आतंकवाद का नेटवर्क वैश्विक स्‍तर पर है, लेकिन इस खतरे से निपटने के लिए हम सिर्फ राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कार्रवाई करते हैं। आतंकवाद की पहुंच और उसकी सप्‍लाई चेन ग्‍लोबल है, लेकिन विभिन्‍न देशों के बीच वास्‍तविक आपसी सहयोग नहीं है।

आतंकवादी गतिविधियों पर प्रतिबंध और उनके खिलाफ कार्रवाई के बिना परमाणु आतंकवाद के खतरे का निवारण नहीं किया जा सकता है।' इसी के साथ ही आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए दुनिया के कुछ देशों के रुख पर भी सवाल खड़े किए। उन्‍होंने कहा, इस बात को भूल जाइए कि आतंकवाद किसी और की समस्‍या है और किसी और का आतंकी है मेरा आतंकी' नहीं है।

ब्रसल्‍ज के हालिया आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए मोदी ने आज के आतंकवाद के स्‍वरूप पर भी अपनी बात रखी। उन्‍होंने कहा, 'परमाणु सुरक्षा की तरफ ध्‍यान खींचकर राष्‍ट्रपति ओबामा ने वैश्‍विक सुरक्षा की दिशा में काफी अहम काम किया है। ब्रसल्‍ज हमलों ने हमें दिखाया कि परमाणु सुरक्षा को आतंकवाद से कितना प्रत्‍यक्ष और तत्‍काल खतरा है। हमें आतंकवाद की तीन समकालीन विशेषताओं पर ध्‍यान देना चाहिए।

पहला, आज के वक्‍त का आतंकवाद जबर्दस्‍त हिंसा को बतौर दिखावा इस्‍तेमाल करता है। दूसरा, अब हम किसी गुफा में छिपे शख्‍स की तलाश नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम शहर में किसी ऐसे आतंकवादी के पीछे हैं जिसके पास कंप्‍यूटर या कोई स्‍मार्टफोन है। तीसरा, सरकार से जुड़े वैसे लोग जो परमाणु हथियारों की तस्‍करी करने वालों और आतंकवादियों के साथ काम कर रहे हैं, वे सबसे बड़े खतरे हैं।