चार दिन में को-आपरेटिव बैंकों में जमा हुए 5000 करोड़

अविनाश पांडेय, नागपुर (15 दिसंबर): नोटबंदी के बाद महाराष्ट्र में को-आपरेटिव बैंकों में पुराने पांच सौ और एक हजार रुपये के करीब पांच हजार करोड़ रुपये जमा हुए हैं। यह रकम महज 10 और 14 नवंबर के बीच बैंक में डिपाजिट हुई। रातों-रात इतनी बड़ी रकम जमा होने से रिजर्व बैंक और नाबार्ड ने मामले की जांच शुरु कर दी है।  

केंद्रीय वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक आफ इंडिया की हरी झंडी के बाद को-आपरेटिव बैंकों में पुराने नोट जमा करने को मंजूरी मिली थी। महाराष्ट्र में करीब 31 को-आपरेटिव बैंकों पर सियासी पार्टियों का कब्जा है। इसमें से ज्यादातर कांग्रेस पार्टी और एनसीपी के कद्दावर नेताओं के कब्जे में है। इन्हीं बैंको की सूबेभर में फैली करीब 3800 ब्रांचेज में ये बड़ी रकम जमा की गई। इससे प्रशासन के कान खडे़ हो गए हैं।

अब आरबीआई और नाबार्ड इस बात की जांच में जुट गया है कि कहीं ये कालाधन सफेद करने की जुगत तो नहीं। नाबार्ड के अफसरों के मुताबिक बैंकों के अकाउंट में अचानक जमा इतनी बडी रकम की जांच शुरू हो गई। अकाउंट में दो लाख रुपये से ज्यादा की जमा रकम जांच के दायरे में है।

- सांगली डिस्ट्रिक्ट को-आपरेटिव बैंक पहले ही जांच के दायरे में

- सांगली डिस्ट्रिक्ट को-आपरेटिव बैंक में 320 करोड़ रुपये रातों-रात जमा हुए।

- पुणे डिस्ट्रिक्ट को-आपरेटिव बैंक में 600 करोड रुपये जमा हुए।