मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018: जीजा शिवराज सिंह चौहान को हराने मैदान में उतरे साले-साहब

अमित कुमार, नई दिल्ली (22 नवंबर): मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के वारासिवनी विधान सभा क्षेत्र पर सबकी नजरें गड़ीं है। टिकट बंटवारे के बाद से ही वारासिवनी हाईप्रोफाइल सीट बन गया है, सबके जेहन में यही सवाल है कि जीजा साले की लड़ाई में जीतेगा कौन। दरअसल वारासिवनी से ही शिवराज सिंह से विद्रोह कर कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे उनके साले संजय सिंह मसानी मैदान में हैं तो शिवराज सिंह ने भी इस सीट को अपनी सम्मान की लड़ाई बना ली है। सवाल सिर्फ जीजा और साले के बीच की लड़ाई का नहीं है, जिसतरह से बागी और निर्दलीय उम्मीदवार जीत का दावा ठोक रहे हैं उसके बाद वारासिवनी की लड़ाई और भी दिलचस्प बन गई है।  

संजय सिंह मसानी रिश्ते में शिवराज सिंह के साले हैं, बीजेपी से टिकट नहीं मिला तो बागी हो गए। डंपर घोटाले और व्यापम घोटाले में भी नाम आया था, कांग्रेस ने जीजा-साले पर खूब हमला किया था बावजूद इसके कांग्रेस ने संजय सिंह मसानी को वारासिवनी से टिकट दे दिया। कांग्रेस घोटालों के लिए संजय सिंह को शिवराज का राजदार कहती थी लेकिन अब उसे हमसफर बना कर कांग्रेस ने संजय सिंह को चुनावी मैदान में उतार दिया है  

शिवराज के साले संजय सिंह मसानी जनसंपर्क पर हैं। चुनाव जीत कर अपने जीजा और मध्य प्रदेश के मामा कहे जाने वाले शिवराज सिंह चौहान को ये संदेश देना चाहते हैं कि सियासी रसूख किसी से कम नहीं। इसलिए वो इसे धर्म और अधर्म के बीच की लड़ाई कह रहे है और साथ ही साथ जीजा शिवराज सिंह चौहान पर हमला करने से भी नहीं चूक रहे।

संजय सिंह बार बार कह रहे हैं कि ये रिश्ते की लड़ाई नहीं है बल्कि धर्म और अधर्म की लड़ाई है, जीत सच्चाई की होगी लेकिन सवाल यही है कि कांग्रेस में आने के बाद ही इन्हें क्यों धर्म और अधर्म का ज्ञान हुआ और बीजेपी में सारी बुराईया दिखने लगी। संजय सिंह मसानी जीत के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं...घर घर जाकर वोटरों से मिल रहे हैं...तो उधर उनकी पत्नी भी अपने पति को जिताने के लिए जमकर पसीना बहा रही है।