भारत में ही है एशिया का सबसे स्वच्छ गांव

नई दिल्ली (2 अक्टूबर): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्‍ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती को स्वच्छ भारत अभियान से जोड़ा था, लेकिन सच्चाई अभी भी वास्तविकता से काफी दूर है। अभी भी सफाई के मामले में हमारे अधिकांश गांवों, कस्बों और शहरों की हालत बहुत खराब है। हालांकि एक सुखद बात है कि एशिया का सबसे साफ़ सुथरा गांव भी हमारे देश भारत है।

यह है मेघालय का मावल्यान्नॉंग गांव जिसे की भगवान का अपना बगीचा (God’s Own Garden) के नाम से भी जाना जाता है। सफाई के साथ-साथ यह गांव शिक्षा में भी अवल्ल है। यहां की साक्षरता दर 100 फीसदी है, यानी यहां के सभी लोग पढ़े-लिखे हैं। इतना ही नहीं, इस गांव में ज्यादातर लोग सिर्फ अंग्रेजी में ही बात करते हैं।

मावल्यान्नॉंग गांव (Mawlynnong Village): खासी हिल्स डिस्ट्रिक्ट का यह गांव मेघालय के शिलॉंन्ग और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से 90 किलोमीटर दूर है। साल 2014 की गणना के अनुसार, यहां 95 परिवार रहते हैं। यहां सुपारी की खेती आजीविका का मुख्य साधन है। यहां लोग घर से निकलने वाले कूड़े-कचरे को बांस से बने डस्टबिन में जमा करते हैं और उसे एक जगह इकट्ठा कर खेती के लिए खाद की तरह इस्तेमाल करते हैं।

यह गांव 2003 में एशिया का सबसे साफ और 2005 में भारत का सबसे साफ गांव बना। इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां की सारी सफाई गांव के लोग स्वयं करते है। पूरे गांव में जगह-जगह बांस के बने डस्टबिन लगे है। किसी भी ग्रामवासी को वो चाहे महिला हो, पुरुष हो या बच्चे हो जहां गंदगी नज़र आती है, सफाई पर लग जाते है । सफाई के प्रति जागरूकता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है की यदि सड़क पर चलते हुए किसी ग्रामवासी को कोई कचरा नज़र आता है तो वो रूककर पहले उसे उठाकर डस्टबिन में डालेगा फिर आगे जाएगा।