सीजेआई के रूप में जस्टिस रंजन गोगोई का पहला दिन- नो नॉनसेंस प्लीज!



न्यूज 24 ब्यूरो, प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली ( 3 अक्टूबर ): 
देश के नए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने बुधवार को अपना कार्यभार संभाला। आज सुबह जस्टिस रंजन गोगोई के मुख्य न्यायाधीश के रुप में शपथ ग्रहण के बाद 12 बजे जब बेंच बैठी, उस समय मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट, कोर्ट नंबर एक में पांव रखने की भी जगह नहीं थी।


कुछ लोग गवाह बनना चाहते थे जस्टिस गोगोई को सीजेआई के रूप में पहले दिन सुनवाई करते हुए देखने का। सुप्रीम कोर्ट के तमाम वकील यह देखना चाहते थे कि मुख्य न्यायाधीश के रूप जस्टिस गोगोई, वकीलों के साथ किस तरह व्यवहार कर रहे हैं! कोर्ट कवर करने वाले तमाम पत्रकार भी मौजूद थे, यह समझने के लिए कि आने वाले करीब 13 महीने, सुप्रीम कोर्ट में कैसे रहने वाले हैं?

पहले दिन ही तस्वीर कुछ-कुछ साफ होने लगी। कोर्ट की कार्यवाही शुरू होते ही एक वकील ने जब नवनियुक्त चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को 'कैप्टन ऑफ जुडिशरी' कह कर बधाई देने की कोशिश की तो जस्टिस रंजन गोगोई ने ये कहते उन्हें रोक दिया कि 'ये काम का वक्त है, कोर्ट रूम बधाइयों की जगह नहीं।' उसके बाद जब मेंशनिंग (मामलों की तत्काल सुनवाई की मांग) के लिए एक वकील खड़ा हुआ, मुख्यन्यायाधीश ने साफ साफ कह दिया  'किसी भी मामले की अर्जेंसी के नाम पर मेंशनिंग नहीं होगी।

अगर किसी को आज ही फांसी होने वाली हो या किसी को उसके घर से निकाला जा रहा हो या घर तोड़ा जा रहा हो, केवल ऐसे मामलों में तत्काल सुनवाई की मांग की जा सकेगी।' और इस तरह सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से चली आ रही मेंशनिंग की व्यवस्था को खत्म कर दिया है। इससे मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट का कम से कम 20 से 25 मिनट का समय बचेगा। इसका तत्कालिक असर ये हुआ कि भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में नक्सल के आरोप में गिरफ्तार समाजसेवी गौतम नौलखा की रिहाई के फैसले के खिलाफ, महाराष्ट्र सरकार की याचिका आज मेंशन नहीं हो पाई।

उसके बाद बारी थी बीजेपी नेता और जनहित याचिका दायर करने के लिए जाने जाने वाले अश्विनी उपाध्याय के चुनाव सुधार से जुड़े जनहित याचिका की। जस्टिस गोगोई ने सवाल किया 'इस मामले में पिटीशनर कौन है?' वकील की लिबास में मौजूद अश्विनी ने जवाब दिया- माई लार्ड, मैं इस मामले में वकील को असिस्ट कर रहा हूं।' जस्टिस गोगोई ने पूछा 'क्या आप इस मामले में पिटीशनर भी हैं?  


एडवोकेट और पिटीशनर! और गाउन भी पहने हैं। कोर्ट का डेकोरम भी तो कोई चीज होती है!' इसी आधार पर आपका पेटिशन खारिज हो जाना चाहिए!' बाद में अश्विनी उपाध्याय ने अपनी पिटीशन वापस ले ली। संकेत साफ है कि सुप्रीम कोर्ट में नया दौर शुरू हो चुका है। जस्टिस गोगोई के दौर में- 'नो नॉनसेंस प्लीज।'