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नागेश्वर राव को CBI की कमान मामले की सुनवाई नहीं करेंगे मुख्यन्यायाधीश

एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्ति करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई बुधवार के लिए टल गई। सोमवार को मुख्यन्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले की

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न्यूज 24 ब्यूरो, प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली (21 जनवरी): एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्ति करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई बुधवार के लिए टल गई। सोमवार को मुख्यन्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। मुख्यन्यायाधीश ने कहा कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए हाई पावर सेलेक्ट कमिटि के सदस्य हैं, जिसकी बैठक 24 जनवरी को प्रस्तावित है ऐसे में वो इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते।

गौरतलब है कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए कमेटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के सबसे बड़े दल का नेता और मुख्यन्यायाधीश सदस्य होते हैं। मुख्यन्यायाधीश ने मामले पर सुनवाई टालते हुए कहा कि बुधवार को कोर्ट नंबर दो यानी जस्टिस ए के सीकरी की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।

जस्टिस सीकरी कैसे करेंगे सुनवाई !

मुख्यन्यायाधीश ने नागेश्वर राव के मामले में सुनवाई से अलग किया उसकी वजह 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' का सिद्धांत है। यहां इसका मतलब यह हुआ कि चूंकि सीजेआई को सीबीआई निदेशक की नियुक्ति पर फैसला लेना है तो नागेश्वर राव के मामले में सुनवाई से इस सिद्धांत का उल्लंघन होगा। अब यह समझना जरूरी है कि यही सिद्धांत जस्टिस सीकरी के साथ भी लागू होता है, क्योंकि जस्टिस एके सीकरी ही थे, जिन्हें हाई पावर कमेटी के सदस्य के तौर पर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के बारे में फैसला लेने के लिए चीफ जस्टिस ने नामित किया था। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री और जस्टिस सीकरी ने एक साथ मिलकर आलोक वर्मा को सीबीआई डायरेक्टर को हटाने का फैसला लिया था। ऐसे में 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' के इस सिद्धांत से जस्टिस सीकरी भी इस मामले से यह कहकर खुद को अलग कर सकते हैं, चूंकि जिस कमिटि ने आलोक वर्मा को हटाने का फैसला किया था और जिसके बाद नागेश्वर राव की नियुक्ति हुई थी, इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते। इस बात की भी संभावना है कि अगर जस्टिस सीकरी खुद इस मामले से अलग नहीं होते तो इसी आधार पर याचिकाकर्ता कॉमनकॉज के वकील प्रशांत भूषण ऐसी मांग कर सकते हैं।

एनजीओ 'कॉमन कॉज' की याचिका

10 जनवरी को आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटाने के बाद सरकार ने एम नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया गया था। एनजीओ कॉमन कॉज ने इस नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दी है।

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