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CAA और NRC के विरोध में इस्तीफा देने वाले आईपीएस को वक्फ बोर्ड में शामिल होने का न्योता

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) और एनआरसी (Nrc) के विरोध में इस्तीफा दे चुके आईपीएस (IPC) अधिकारी को लेकर फिर से महाराष्ट्र (Maharashtra) की महाविकास आघाडी सरकार

Maharashtra, महाराष्ट्र

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दीपक दुबे, न्यूज 24 ब्यूरो, मुंबई(14 जनवरी): नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) और एनआरसी (Nrc) के विरोध में इस्तीफा दे चुके आईपीएस (IPC) अधिकारी को लेकर फिर से महाराष्ट्र (Maharashtra) की महाविकास आघाडी सरकार ने सियासत Political) शुरू कर दी है।महाराष्ट्र (Maharashtra) सरकार (Government) की तरफ से अब्दुल रहमान (Abdul Abdulla) को वक्फ बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया गया है। हालांकि इस प्रस्ताव को अब्दुल रहमान की तरफ से स्वीकार नहीं किया गया है। वहीं बीजेपी ने शिवसेना को हिन्दू विरोधी तक करार दे दिया। एक तरफ महकविकास आगाड़ी की सरकार अब्दुल रहमान को वक्फ बोर्ड में अहम पद देने का न्यौता दे रही तो दूसरी तरफ महाराष्ट्र भाजपा के नेता ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे व शिवसेनान पर निशाना साधते हुए कहा डाला कि हिंदुओं की बात करने वाली शिवसेना महाराष्ट्र में आये हिंदुओ के विरोध में है। 

अब्दुल रहमान को यह न्योता ठाकरे सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक की तरफ से दिया गया। इस न्योते को लेकर जब नवाब मलिक से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर कोई शख्स ईमानदार है और अपने समुदाय के बारे में सोचता है तो उसे न्योता देने में गलत क्या है। मलिक ने कहा कि रहमान के वीआरएस को लेकर वह मुख्यमंत्री से बात करेंगे। सीएए और एनआरसी के विरोध में इस्तीफा देने वाले अधिकारी को ठाकरे सरकार की तरफ से दिए गए ऑफर पर सियासत भी गरमाने लगी है। विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा कर दिया। बीजेपी प्रवक्ता व विधायक राम कदम ने ठाकरे सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो हिन्दू, बौद्ध भाई बाहर से यहां आकर रह रहे हैं। शिवसेना उनको नागरिकता देने का विरोध कर रही है और सीएए और एनआरसी का विरोध करने वालों को बड़ा ओहदा।

हालांकि अब्दुल सत्तार के द्वारा इस्तीफा दिये जाने पर फिर सवाल खड़े हुए थे विपक्ष की तरफ से सवाल खड़े किए गए थे टाइमिंग को लेकर अब जब वक्फ बोर्ड का न्योता दिया गया है तो अब्दुल ने सोचने के लिए थोड़ा वक्त मांगा है ऐसे में देखना होगा कि सत्तार का फैसला महाराष्ट्र की राजनीति में क्या कमाल दिखाएगा, क्योंकि तमाम मुद्दों पर विपक्ष कांग्रेस-एनसीपी से ज्यादा शिवसेना को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए लगातार दिखाई दे रही है।


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