CIA ने इंटरसेप्ट किया कोड '7 कलश रख दो' और धरे गए IS के 20 संदिग्ध

नई दिल्ली (23 जनवरी) :  अभी तक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS)  को देश में संभावित ख़तरे के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन जिस तरह शुक्रवार को देशभर में कई शहरों से आईएस के 20 संदिग्ध समर्थकों की धरपकड़ की गई, उससे साफ़ है कि अब ये आतंकी संगठन गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गया है। यह पहली बार हुआ है जब साफ़ तौर पर भारत में आईएस की मौजूदगी की आशंका के शुरुआती सुराग मिले हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को यह बड़ी कामयाबी अमेरिकी खुफ़िया एजेंसी सीआईए की मदद से मिली है।  

बताया गया है कि सीआईए को आईएस के संदिग्धों के बीच एक कोड वर्ड में की जा रही बातचीत के बारे में पता चला। '7 कलश रख दो' को डिकोड करते हुए सीआईए ने भारतीय एजेंसियों को अलर्ट किया। दरअसल ये 7 जगहों पर ब्लास्ट करने का कोड था। सूत्रों ने बताया कि सीआईए ने सीरिया और इराक में आईएस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सैकड़ों कंप्यूटर और स्मार्ट फोन्स की आईपी एड्रेस पर नजर बनाए रखी है। इसमें से आईएस के लोग कई आईपी एड्रेस का इस्तेमाल फेसबुक खोलने के लिए भी कर रहे थे। इनमें से एक आईपी एड्रेस का इस्तेमाल आईएस का कमांडर शाफी अरमार भी कर रहा था। शाफी को कोड नेम यूसुफ अल हिंदी थी। वो इस आईपी एड्रेस का इस्तेमाल भारत में अखलाक उर रहमान जैसे कई औरों से बात करने के लिए करता था। अखलाख को 3 अन्य के साथ हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया है। सीआईए इनके बीच की बातचीत और वाट्सऐप-फेसबुक पर शेयर किए जा रहे मेसेज को भी इंटरसेप्ट करने में सफल रही। सूत्रों ने बताया कि मिड जनवरी के आसपास यूसुफ और अखलाक के बीच एक मेसेज का आदान-प्रदान हुआ, '7 कलश रख दो।' इसे 7 जगहों पर बम रखने के रूप में डिकोड किया गया। सीआईए ने ये सूचना भारतीय एजेंसियों के साथ साझा की। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को इस बारे में ब्रीफ किया गया। इस मेसेज को भेजने के अगले ही कुछ घंटों में संदिग्ध रूड़की से हरिद्वार शिफ्ट कर। सुरक्षा एजेंसियों ने इनपर निगाह बनाए रखी। फिर कुछ घंटे बाद ये हरिद्वार की रेकी कर रुड़की वापस लौट आए। इसी तरह आईएस के दूसरे मॉड्यूल्स भी संदिग्ध हरकत करते देखे गए। इसके बाद पूरे देश में आईएस के मॉड्यूल को ध्वस्त करने का आदेश जारी हुआ। एजेंसियां पुलिस और ऐंटी-टेरर स्क्वॉड की मदद से दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद में सक्रिय हो गईं। दिल्ली में कंट्रोल रूम बनाया गया। रुड़की-हरिद्वार में कुछ ज्यादा सक्रियता बरती गई क्योंकि आशंका थी कि संदिग्ध जल्द ही यहां कुछ कर सकते हैं। पकड़े गए संदिग्धों में से नॉर्थ इंडिया मॉड्यूल को स्पेशल सेल के हवाले किया गया है। जबकि बाकी एनआईए और पुलिस के कब्जे में हैं।