चीन ने पाकिस्तान से तोड़ी दोस्ती, PoK को बताया भारत का हिस्सा !

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 नवंबर): पाकिस्तान को लेकर चीन के रूख में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। PoK को पाकिस्तान का हिस्सा बताने वाले चीन ने उसे बड़ा झटका दिया है। चीनी ने अपने नक्शे में पाक अधिकृत कश्मीर को भारत के हिस्से में बताया है। दरअसल चीन सरकारी टीवी चैनल CGTN ने PoK को भारत के नक्शे में दिखाया है। चीनी सरकारी टेलीविजन चैनल CGTN पिछले शुक्रवार को पाकिस्तान में चीन के वाणिज्य दूतावास पर आतंकी हमले की रिपोर्ट दिखा रहा था। उसी दौरान उसने यह नक्शा दिखाया था। इस नक्शे में पूरे कश्मीर को भारत के हिस्से के तौर पर दिखाया गया।

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फिलहाल अभी यह साफ नहीं है कि यह चिनपिंग सराकार का सोच-समझकर उठाया गया कदम था या अनजाने में यह नक्शा दिखाया गया था। हालांकि, इस बात की संभावना नहीं के बराबर है कि चीन का सरकारी टीवी चैनल सत्ता के खिलाफ जाकर कोई काम करे। अभी तक यह भी साफ नहीं है कि इस घटनाक्रम के तार भारत और चीन सरकार की हालिया उच्च स्तरीय बातचीत से जुड़े हैं या नहीं। आपको बता दें कि भारत काफी लंबे समय से चीन से इस बात की मांग कर रहा है कि वो पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए। चीन के सरकारी टीवी चैनल CGTN को आमतौर पर CCTV-9 और CCTV न्यूज के तौर पर जाना जाता है। यह चीन इंटरनेशनल इंग्लिश न्यूज चैनल है, जिसपर चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क ग्रुप का मालिकाना हक है। यह पेइचिंग स्थित चाइना सेंट्रल टेलीविजन का हिस्सा है। यह चैनल 2000 में लॉन्च हुआ था।

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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनपिंग की इस हफ्ते जी-20 समिट के दौरान मुलाकात हो सकती है। यह इस साल चिनपिंग से मोदी की चौथी मुलाकात होगी। वहीं, चाइनीज टेलीविजन का हालिया प्रसारण पाकिस्तान सरकार और आर्मी का ध्यान खींच सकता है। पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाए जाने की वजह चीन-पाकिस्तान-इकनॉमिक-कॉरिडोर (सीपीईसी) भी हो सकता है। सीपीईसी पर भारत की मजबूत पकड़ है क्योंकि यह इसकी संप्रभुता का उल्लंघन करता है। पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के जरिए गुजरने वाला सीपीईसी चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत सबसे अहम कनेक्टिविटी लिंक है।

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चीन ने भारत को परेशान करने के लिए बीआरआई के शुरू होने से पहले ही पीओके में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भारी निवेश किया था। भारत ने चाइनीज फंडिंग के जरिए पीओके में बनने वाले प्रॉजेक्ट्स पर आपत्ति जताते हुए चीन और पाकिस्तान सरकार को कई पत्र लिखे थे। चीन ने कथित तौर पर पीओके में अपनी बटालियन तैनात कर दी थी, जिसकी भारत ने कड़े शब्दों में निंदा की थी।