एक चीनी युद्धबंदी की गुहार मुझे अपने देश जाने दीजिए


नई दिल्ली (24 अक्टूबर): भारत और चीन के बीच 1962 में हुए लड़ाई में दोनों तरफ के बहुत से सैनिक युद्धबंदी बने थे। उन्हीं में से एक वांग ची नाम के एक चीनी युद्धबंदी भी हैं जो भारत में रहते हैं।

वांग ची 1969 से मध्य प्रदेश के बालाघाट के तिरोड़ी गांव में रहते है। अब वे अपने परिजनों से मिलने अपने देश चीन जाना चाहते हैं। वांग ची ने 1960 में चीनी सेना ज्वाइन की थी। भारत में युद्धबंदी बनने के बाद अब वे राज बहादुर नाम से जाने जाते है।

वांग ची ने बताया कि उन्हें जनवरी 1963 में भारत-चीन युद्ध के दौरान भारतीय रेड क्रॉस ने पकड़कर असम में भारतीय सेना के हवाले कर दिया था। उसके बाद उनको भारत के अलग-अलग जेलों में रखा गया। इस तरह वांग ची को भारत में रहते हुए करीब पांच दशक हो चुके हैं।

अपने इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वे साल 2014 से भारत और चीन दोनों सरकारों से अपने देश चीन वापस जाकर भाई-बहन से मिलने की अनुमति मांगी थी, पर अभी तक दोनों देशों की सरकारों ने उसके इस मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से उम्मीदें है कि वे उनकी अर्जी पर ज़रूर ध्यान देंगे।

उन्होंने कहा कि साल 2013 में बड़े मशक्कत के बाद चीनी पासपोर्ट (नंबर G54188589) जारी हुआ। इसी आधार पर वांग ची ने अपनी भारतीय पत्नी और बच्चों के पास लौटने की शर्त पर अपने वतन चीन जाने की अनुमति मांगी थी। वांग ची ने अखबार को दिए इंटरव्यू में बताया कि मैं अपनी मां का सबसे लाड़ला बेटा था। मां का निधन 2006 में हो गया। तीन साल बाद में इंटरप्रटर की मदद से अपने भतीजे वांग यिन चुन से नई दिल्ली में मिले थें। उसके बाद उनकी उम्मीद जगी की वे अपने परिजनों से पाएंगे।