चीनी कंपनियां पाकिस्तान में बिजनेस और जमीनें खरीदने में जुटी, जानें वजह

नई दिल्ली ( 3 फरवरी ): चीनी कंपनियां पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान में जमीनें खरीदने और बिजनेस बढ़ाने में जुटी हुई हैं। बीते कुछ महीनों में पाकिस्तान के साथ हुई बड़ी डील्स के चलते चीनी कंपनियां अब वहां बड़े पैमाने पर कारोबार का विस्तार करने और जमीन खरीदने में जुटी हैं।

चीन ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ ट्रेड रूट विकसित करने के लिए 57 अरब डॉलर यानी करीब 3 लाख 80 हजार करोड़ रुपये की डील की है। इसके बाद से ही चीनी कंपनियां बड़े पैमाने पर पाकिस्तान में निवेश को लेकर उत्सुक हैं।

पाकिस्तान की कई दिग्गज कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि चीनी कंपनियां मुख्य तौर पर सीमेंट, स्टील, एनर्जी और टेक्सटाइल सेक्टर्स में निवेश करने को उत्सुक हैं। इन सेक्टरों को 270 अरब डॉलर की पाकिस्तानी इकॉनमी की रीढ़ माना जाता है।

विश्लेषकों का मानना है कि चीनी कंपनियां अपनी सरकार के 'वन रोड, वन बेल्ट प्रॉजेक्ट' के तहत निवेश कर रही हैं। चीन के ग्लोबल नेटवर्क तैयार करने की इस योजना का पाकिस्तान बेहद अहम हिस्सा है। मौजूदा दौर मे चीन की घरेलू इकॉनमी कमजोर पड़ी है, जिसके चलते उसने विदेशी निवेश बढ़ाने की कोशिशें तेज की हैं। हाल ही में एक चीनी के नेतृत्व वाले कंसर्टियम ने पाकिस्तान के स्टॉक एक्सचेंज में बड़ा हिस्सा लिया है। इसके अलावा शंघाई इलेक्ट्रिक पावर ने 1.8 अरब डॉलर में पाकिस्तान की सबसे बड़ी एनर्जी फर्म K-इलेक्ट्रिक का अधिग्रहण किया है।

सीमेंट से लेकर केमिकल्स तक का कारोबार करने वाले युनूस ब्रदर्स ग्रुप के चीफ एग्जिक्यूटिव मुहम्मद अली तब्बा ने कहा, 'चीनी कंपनियों के पास काफी पूंजी है और वे पाकिस्तान में बड़े निवेश की ओर देख रही हैं।' तब्बा ने कहा कि युनूस ब्रदर्स ने एक चीनी कंपनी के साथ मिलकर के-इलेक्ट्रिक का अधिग्रहण करने की कोशिश की थी, लेकिन असफलता हाथ लगी। अब यह समूह करीब 2 अरब डॉलर का एक अन्य जॉइंट वेंचर खड़ा करने की तैयारी मे है।