बढ़ते कर्ज से चीन परेशान, कभी भी लुढ़क सकती है इकोनॉमी

बीजिंग (29 दिसंबर): चीनी अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और यह तेजी विकास कर रहा है। लेकिन एक रिसर्च से पता चला है कि चीनी अर्थव्यवस्था में विकास का गुब्बारा भविष्य में कभी भी फूट सकता है। रॉयटर्स के रिसर्ज के मुताबिक चीन भारी कर्ज लेकर इकॉनमिक ग्रोथ करने मे जुटा है और यह स्थिति लंबे समय नहीं रह सकती। आम लोगों पर बढ़ते कर्ज, प्रॉपर्टी में अप्रत्याशित उछाल और बढ़ते कॉर्पोरेट कर्ज के चलते मार्केट भविष्य में बुरी तरह लड़खड़ा सकता है।

यह कहानी 2009 में शुरू हुई थी, जब चीन ने पूरी दुनिया में छाई आर्थिक संकट के दौरान 600 बिलियन डॉलर यानी करीब 40,874 अरब रुपये की योजनाओं को लॉन्च किया था। चीन ने अर्थव्यस्था को बढ़ाने के मकसद से यह कदम उठाया था। उसके बाद सरकारी संस्थाओं से कर्ज लेने की लहर चल गई और आज यह एक बोझ साबित हो रहा है। इस साल चीन का कर्ज उसकी GDP का 250 फीसदी हो चुका है। इनमें से सबसे अधिक कर्ज सरकारी कंपनियों का है,जिन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट के लिए कर्ज लेने का भी टास्क दिया गया था।

चीन ने मौजूदा वित्तीय साल में विकास दर 6.5 से 7 फीसदी के बीच तय कर रखा जो इस साल अपने लक्ष्य से काफी दूर दिखाई दे रहा है। ऐसे में चीनी सरकार एक बार फिर से कर्ज के ही भरोसे अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की तैयारी में है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक चीन की तरह जिन देशों ने तेजी से कर्ज लेकर विकास को रफ्तार देने की कोशिश की, वे जल्दी ही संकट में घिर गए। इसके अलावा बैंक फॉर सेटलमेंट्स ने भी कहा है कि आगामी तीन सालों में चीन के बैंकिंग सेक्टर को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

चीन में हाउसहोल्ड डेट इस साल रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए GDP के 40 फीसदी के बराबर हो गया है। सबसे बड़ी चिंता की बात है कॉर्पोरेट कर्ज, यह सरकारी फर्म्स से ही लिया गया है और अब इसका आंकड़ा GDP के 169 फीसदी के करीब जा पहुंचा है।