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अंतरिक्ष में चीन ने माना भारत का लोहा, बराबरी पर आने के लिए तैयार किया स्मार्ट ड्रैगन

सरकारी मीडिया ने सोमवार को बताया कि नई 'लॉन्ग' रॉकेट श्रृंखला में ठोस ईंधन वाले रॉकेट शामिल हैं और इनका सांकेतिक नाम 'स्मार्ट ड्रैगन (एसडी) परिवार' रखा गया है। देश की शीर्ष रॉकेट निर्माता 'चाइना अकैडमी ऑफ लॉन्च वीइकल्स टेक्नॉलजी' की कमर्शल यूनिट 'चाइना रॉकेट' ने रविवार को 'टेंगलोंग लिक्विड-प्रोपेलेंट रॉकेट' का अनावरण किया

 न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (21 अक्टूबर): चीन कई मामलों में भारत से बहुत आगे है, लेकिन स्पेस लॉन्चिंग के मामले में भारत का उससे आगे होना उसे अखर रहा है। यही वजह है कि वह वैश्विक अंतरिक्ष प्रक्षेपण बाजार (ग्लोबल स्पेस लॉन्च मार्केट) को आकर्षित करने के लिए भारत के साथ अपनी प्रतिस्पर्धा तेज कर रहा है। इसी क्रम में चीन ने अपनी नई पीढ़ी के कमर्शल कैरियर रॉकेटों का अनावरण किया है, जो 1.5 टन तक का भार ले जा सकते हैं।

चीन के एक सरकारी मीडिया ने सोमवार को बताया कि नई 'लॉन्ग' रॉकेट श्रृंखला में ठोस ईंधन वाले रॉकेट शामिल हैं और इनका सांकेतिक नाम 'स्मार्ट ड्रैगन (एसडी) परिवार' रखा गया है। देश की शीर्ष रॉकेट निर्माता 'चाइना अकैडमी ऑफ लॉन्च वीइकल्स टेक्नॉलजी' की कमर्शल यूनिट 'चाइना रॉकेट' ने रविवार को 'टेंगलोंग लिक्विड-प्रोपेलेंट रॉकेट' का अनावरण किया।

सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने बताया कि रॉकेट की नई सीरीज का उद्देश्य घरेलू और वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण की बढ़ती क्षमता का लाभ उठाना है। चीन ने चंद्र मिशन के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया है और वह 2022 तक अपना स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित कर अपने अंतरिक्ष मिशन को मंगल तक बढ़ाना चाहता है। हालांकि, इसके बावजूद वह वैश्विक वाणिज्यिक रॉकेट बाजार को आकर्षित करने में भारत के मुकाबले पीछे है।

ग्लोबल टाइम्स ने 2017 में एक लेख में चेतावनी दी थी कि वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग में चीन का अंतरिक्ष उद्योग भारत से पीछे है। लेख में कहा गया था कि भारत द्वारा सफलतापूर्वक 104 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने की घटना चीन के वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग के लिए जागने का वक्त है और कई ऐसे सबक हैं, जिन्हें चीन सीख सकता है।

Images Courtesy:Google

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